सुलतानपुर,22 नवंबर (आरएनएस)। हजार सर्जरी का सफर और मानवता की मिशाल स्वशासी राजकीय महाविद्यालय की नेत्र सर्जन एवं सहायक प्राचार्य डॉ. शिवप्रिया गुप्ता न केवल अपनी दक्षता के लिए बल्कि अपनी संवेदनशीलता और मानवता के लिए भी जानी जाती हैं। बीते एक वर्ष में उन्होंने लगभग 1000 सफल नेत्र सर्जरी कर चिकित्सा जगत में एक अलग पहचान बनाई है। इनमें से 180 सर्जरी अत्याधिक जटिल श्रेणी में थीं, जिन्हें उन्होंने अपनी कुशलता और धैर्य से सफलतापूर्वक अंजाम दिया। बीते दिन मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग में एक पीडि़त मां रोती-बिलखती पहुंची। उसके चार माह के बच्चे की आंख में पिज्जा का कण फंस गया था। आंख पूरी तरह बंद हो चुकी थी और अंदर खून जम गया था। पीड़ा से तड़पते बच्चे को देखकर मां डॉक्टर शिवप्रिया गुप्ता के सामने गिड़गिड़ाने लगी। डॉ. शिवप्रिया ने पहले मां को ढाढ़स बंधाया और विश्वास दिलाया कि बच्चा पूरी तरह ठीक हो जाएगा। ओपीडी में ही मात्र 20 मिनट की प्रक्रिया में उन्होंने बच्चे की आंख से पिज्जा का कण बाहर निकाला, आंख की सफाई की और दवा देकर बच्चे को तुरंत आराम दिला दिया। कुछ ही देर में बच्चे की आंख पूरी तरह खुल गई और दर्द गायब हो गया। डॉ. शिवप्रिया गुप्ता अपनी सटीक सर्जरी, उत्कृष्ट परामर्श और मानवीय व्यवहार के कारण आज मरीजों की पहली पसंद बन चुकी हैं। कम समय में उच्च सफलता दर और कठिन से कठिन नेत्र सर्जरी करने की उनकी क्षमता ने उन्हें जिले ही नहीं, प्रदेश के लोकप्रिय डॉक्टरों में शामिल कर दिया है। अपनी मेधा, अनुभव और संवेदनशीलता के कारण डॉ. शिवप्रिया उन विरले डॉक्टरों में हैं जो मरीजों की आंखों में सिर्फ रोशनी ही नहीं लौटातीं, बल्कि उनके दिलों में विश्वास भी जगाती हैं। उनका यह मानवीय और चिकित्सकीय योगदान समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।
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