कृष्णानगर में एक बीएलओ की खुदकुशी पर सीएम ममता ने उठाएं सवाल
कोलकाता,22 नवंबर (आरएनएस)। और कितनी जानें जाएंगी? इसके लिए और एसआईआर के लिए कितने लोगों को मरना पड़ेगा ? इस प्रोसेस के लिए हमें और कितनी लाशें देखनी पड़ेंगी? यह अब सच में बहुत चिंता की बात हो गई है!! उक्त बात बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया में व्यक्त की। मुख्यमंत्री व तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने आज एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कृष्णानगर में एक बीएलओ की आत्महत्या पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मृत बीएलओ रिंकू तरफदार, जो प्राथमिक विद्यालय में पैरा-शिक्षिका थीं और एसी-82 चपरा के पार्ट नंबर 201 की बीएलओ के रूप में कार्यरत थीं, ने आत्महत्या से पहले अपने सुसाइड नोट में चुनाव आयोग को दोषी ठहराया है। मुख्यमंत्री ने अपनी पोस्ट में सुसाइड नोट की प्रति भी साझा की है।ममता बनर्जी ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान लगातार बीएलओ की मौतें बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने सवाल उठाते हुए लिखा, “और कितनी जानें जाएंगी? और कितने लोगों को इस एसआईआर के लिए मरना पड़ेगा? हम कितनी और लाशें देखेंगे?” मुख्यमंत्री ने इस घटना को अत्यंत भयावह और चेतावनीपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती ऐसी घटनाएं प्रशासन और समाज—दोनों के लिए गहरी चिंता का विषय हैं। राज्य सरकार के अनुसार, मृत बीएलओ कृष्णानगर के अपने आवास पर मृत पाई गईं। प्राथमिक जांच में पता चला है कि वे एसआईआर के दौरान अत्यधिक तनाव में थीं। परिवार ने भी उनके ऊपर बढ़ते काम के दबाव का आरोप लगाया है। बहरहाल बीएलओ के दबाव के बारे में रिपोर्टर्स के एक सवाल के जवाब में, राज्य के चीफ इलेक्शन ऑफिसर मनोज अग्रवाल ने शुक्रवार को कहा था, “हमें एक तय टाइम फ्रेम में काम पूरा करना होता है, इसलिए थोड़ा दबाव होता है। पड़ोसी राज्य बिहार में भी एसआईआर हुआ है। ऐसा नहीं है कि हम यह नहीं कर सकते।” उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि एक बूथ में वोटर्स की ज्यादा से ज्यादा संख्या 1200 है, लेकिन ज़्यादातर बूथों में वोटर्स की एवरेज संख्या लगभग 800 है। इसलिए, हमें असली हालात को ध्यान में रखकर काम करना होगा।
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