पटना , 22 नवम्बर (आरएनएस)।भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे पश्चिम बंगाल में संवैधानिक प्रक्रिया से चल रहे एसआईआर और एनआरसी से डर रही हैं, क्योंकि इससे उनके द्वारा पालित और वोट के लिए तैयार किए गए घुसपैठियों का भंडाफोड़ होगा। इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन द्वारा हिंदुत्व और संस्कृत को अपमानित करने वाले बयानों की भी निंदा की। गौरव भाटिया ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार विकास, एकता और नागरिक अधिकारों के पक्ष में है, जबकि विपक्ष विभाजन और सांप्रदायिक राजनीति का सहारा ले रहा है। गौरव भाटिया ने कहा कि जैसा सभी देख रहे हैं, संवैधानिक तरीके से 12 प्रदेशों में एसआईआर की प्रक्रिया चल रहा है। कुछ राज्यों में, खासकर पश्चिम बंगाल में, ममता बनर्जी तुष्टीकरण की पराकाष्ठा पार करते हुए घबराई और डरी हुई दिखाई दे रही हैं, कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत एसआईआर क्यों हो रही है। यह स्वाभाविक रूप से पूछा जाएगा कि एसआईआर, जो यह सुनिश्चित करेगी कि कौन भारतीय नागरिक है और केवल वही मतदान करेंगे, उससे ममता बनर्जी इतनी व्याकुल और चिंतित क्यों हैं। उनकी ऐसी क्या मजबूरी है कि वे एसआईआर से दूरी बना रही हैं और उसका विरोध कर रही हैं। अब यह बात पूरी तरह स्पष्ट हो चुकी है। पश्चिम बंगाल की जनता भी समझ चुकी है कि डरी हुई ममता बनर्जी जानती हैं कि जनता उन्हें नकार रही है और राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने जा रही है। ममता बनर्जी की पूरी राजनीति सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और घुसपैठियों के वोट पर आधारित रही है। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि जब विभिन्न चैनलों पर यह खबर चली कि घुसपैठिए वापस अपने देश लौट रहे हैं, तब देश के नागरिक प्रसन्न थे, लेकिन ममता बनर्जी आंखों में नमी लिए दुख, चिंता और गहरी व्यथा में दिखाई दीं। गौरव भाटिया ने कहा कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ममता बनर्जी के मन में यह चल रहा है कि ममता बनर्जी ने इन घुसपैठियों को पाला-पोसा, उन्हें झूठे प्रमाण पत्र दिलवाए ताकि समय आने पर वे उनके लिए वोट करें, लेकिन अब चुनाव नजदीक है और घुसपैठिए वापस जा रहे हैं। ममता बनर्जी को यह पता नहीं है, कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार का संकल्प बेहद स्पष्ट और दृढ़ है। जैसा कि गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा है कि भारत में केंद्र और राज्य की सरकारें भारत के नागरिक चुनेंगे, कोई घुसपैठिया नहीं। यह हमारा देश है, इस वतन से लोगों को मोहब्बत है और इसके लिए वे अपनी जान तक दे सकते हैं। यह कोई धर्मशाला नहीं है कि घुसपैठिए आएं और भारतीय नागरिकों का हक छीन लें। एक तरफ देश के लिए यह गर्व का क्षण है कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर पर पताका फहराई जा रही है, लेकिन ममता बनर्जी के इशारे पर उनके नेता हुमायूं कबीर 6 दिसंबर को पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने की बात कहते हैं। यह स्वाभाविक रूप से पूछा जाएगा कि ममता बनर्जी की आस्था संविधान में है भी या नहीं। एनआरसी लागू होने की बात पर ममता बनर्जी कहती हैं कि यदि एनआरसी लागू हुआ तो देश में गृह युद्ध हो जाएगा। वहीं उनके नेता फिरहाद हकीम, जो भारत के भीतर ही पश्चिम बंगाल की एक जगह को ‘मिनी पाकिस्तान’ कहते हैं, धमकियां देते हैं कि यदि भाजपा पश्चिम बंगाल में आई तो वे लोगों की टांग तोड़ देंगे। गौरव भाटिया ने कहा कि इसी तरह अब यह साफ दिख रहा है कि किस प्रकार ममता बनर्जी हिंदू-विरोधी रुख अपनाकर तुष्टीकरण की राजनीति कर रही हैं। पश्चिम बंगाल में एक व्यक्ति ने जय श्री राम का नारा लगाया, तो ममता बनर्जी अपनी गाड़ी से गुस्से में उतरकर तिलमिलाई हुई आवाज में उस व्यक्ति से कहती हैं कि तुम्हारी चमड़ी उधेड़ दूंगी। ममता बनर्जी के हिसाब से उस व्यक्ति की गलती यही थी कि उसने जय श्री राम कहा। दूसरी तरफ जब ममता बनर्जी से घुसपैठियों को लेकर प्रश्न पूछा जाता है, तो वे कहती हैं कि इनको कोई हाथ न लगाए। धर्म के आधार पर वे घुसपैठियों को दूध देने वाली गाय बताकर कहती हैं कि इसकी दुलत्ती भी मैं सह लूंगी। ममता बनर्जी का यह दोहरा रवैया अब पूरी तरह उजागर हो चुका है। अब टीएमसी की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी को कड़ा सबक सिखाने जा रही है। गौरव भाटिया ने कहा कि डीएमके के नेता उदयनिधि स्टालिन, जिन्हें केवल हिंदुओं से नफरत करने के लिए जाना जाता है, उनका वक्तव्य था कि हिंदुत्व और हिंदू डेंगू-मलेरिया की तरह हैं, एक रोग है। इस बयान से करोड़ों सहिष्णु देशभक्त हिंदुओं की भावनाएं आहत हुईं। अब दोबारा हिंदुओं और हमारी संस्कृति को गाली देते हुए, उदयनिधि स्टालिन कह रहे हैं कि संस्कृत एक ‘मृत भाषा’ है। वे भूल जाते हैं कि हमारी संस्कृति और धार्मिक ग्रंथों की आधारशिला, करोड़ों हिंदुओं की आस्था की बुनियाद यदि कुछ है, तो वह संस्कृत भाषा है। यह घटिया और घिनौना मजाक उदयनिधि स्टालिन हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के लिए बार-बार करते रहते हैं। उदयनिधि स्टालिन को बताना चाहिए कि उनका यह रवैया क्या है और देश जानना चाहता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी सकारात्मक राजनीति के माध्यम से विकास और अखंडता को आगे बढ़ाया है और एकजुटता के प्रतीक बन गए हैं। वहीं उदयनिधि स्टालिन केवल अराजकता और विभाजन का पर्याय बनकर रह गए हैं। यह तब है जब इससे पहले हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने वाले बेतुके बयानों के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने डीएमके के नेताओं को फटकार लगाई थी और कहा था कि किसी वर्ग विशेष की भावनाओं को आहत करने वाले इस तरह के बयान कतई नहीं दिए जाने चाहिए।
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