भिलाई, 23 नवंबर (आरएनएस)। भारत-रूस मित्रता के प्रतीक के रूप में प्रसिद्ध भिलाई का मैत्री गार्डन अब निजी हाथों में दिए जाने की प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा है। सेल (स््रढ्ढरु) प्रबंधन ने गार्डन और उसमें स्थित चिडिय़ाघर के संचालन के लिए इच्छुक संस्थाओं से प्रस्ताव मांगते हुए विज्ञापन जारी किया है। विज्ञापन जारी होने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मैत्री गार्डन का प्रबंधन अब आउटसोर्स मॉडल या निजी साझेदारी के माध्यम से संचालित किया जा सकता है।
करीब 140 एकड़ क्षेत्र में फैला मैत्री गार्डन वर्ष 1972 में स्थापित किया गया था और यह लंबे समय से भिलाई स्टील प्लांट से जुड़ी शहर की पहचान का प्रमुख हिस्सा रहा है। गार्डन में मौजूद चिडिय़ाघर सफेद बाघों की नर्सरी के रूप में पहचान रखता है और यहां से सफेद बाघ और शेर देश के विभिन्न चिडिय़ाघरों में भेजे जाते रहे हैं। यह स्थल पर्यटन, परिवारिक भ्रमण, बच्चों की शैक्षणिक गतिविधियों और जैव-विविधता संरक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
निजीकरण की प्रक्रिया शुरू होते ही कर्मचारी यूनियनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उनका कहना है कि निजी प्रबंधन में गार्डन के संचालन का आधार जनहित के बजाय व्यावसायिक लाभ हो सकता है, जिससे प्रवेश शुल्क और उपयोग दरों में बढ़ोतरी होने की आशंका है। भिलाई के विधायक देवेंद्र यादव ने भी इस कदम पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि सार्वजनिक क्षेत्र की परिसंपत्तियों को निजी हाथों में सौंपे जाने की यह एक और कड़ी है।
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों ने भी चिंता जताई है कि निजी संचालन के बाद संवेदनशील प्रजातियों, विशेषकर सफेद बाघों के संरक्षण को प्राथमिकता मिलेगी या नहीं इस पर स्पष्टता जरूरी है। उनका कहना है कि मैत्री गार्डन केवल मनोरंजन स्थल नहीं, बल्कि पर्यावरणीय धरोहर है, इसलिए इसके प्रबंधन में संरक्षण और सार्वजनिक हित सर्वोपरि रहना चाहिए।
इस पूरे मामले पर शहर में चर्चा तेज है और नागरिक यह जानने को उत्सुक हैं कि निजीकरण के बाद गार्डन का स्वरूप, संचालन नीति, शुल्क संरचना और पहुंच व्यवस्था किस तरह बदलेगी। फिलहाल सेल द्वारा विज्ञापन जारी होने के साथ प्रक्रिया औपचारिक रूप से आगे बढ़ चुकी है और आने वाले दिनों में प्रस्ताव आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।
००००
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

