कथित मालिक ने प्रस्तावित मस्जिद की जमीन की घेराबंदी की
मुर्शिदाबाद 26 नवंबर (आरएनएस)। मुर्शिदाबाद में 6 दिसम्बर को बाबरी मस्जिद के नींव पर लगा ग्रहण लग गया है। जी हां, मुर्शिदाबाद में देश भर में तब चर्चा व विवादों में आ गया जब तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर द्वारा इसी 6 दिसम्बर को एक और कथित बाबरी मस्जिद के नींव रखने का ऐलान डंके की चोट पर किया। लेकिन अब पूरा मामला जमीन विवाद को लेकर एक अजीब मोड़ पर आ गया है। मुर्शिदाबाद के भरतपुर विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर द्वारा छह दिसंबर को बाबरी मस्जिद का शिलान्यास करने की घोषणा के बाद अब नया विवाद खड़ा हो गया है। जिस छह बीघा जमीन को विधायक ने मस्जिद निर्माण के लिए खरीदा हुआ बताया था, उस जमीन के कथित मालिक ने खुद मौके पर पहुंचकर उसे घेर दिया और साफ कहा कि उन्होंने यह जमीन किसी को बेची ही नहीं है। जमीन की घेराबंदी से पूरा मामला ही एक अलग मोड़ पर आ गया है। बेलडांगा में राष्ट्रीय राजमार्ग 12 के किनारे स्थित उस जमीन को मालिक निज़ामुद्दीन चौधरी ने घेर दिया। उन्होंने कहा, यह पूरी जमीन मेरी है। मैंने किसी को नहीं बेचा। अगर कोई कहता है कि उसने मुझसे खरीद ली है तो वह सरासर झूठ बोल रहा है। निज़ामुद्दीन ने आगे कहा, यह बाबरी मस्जिद एक विवादित मुद्दा है। इस भावनात्मक मुद्दे से खेल क्यों? पहले मुसलमानों के मौजूदा मस्जिदों की हालत सुधारी जाए। मैं इस जमीन पर मस्जिद के पक्ष में नहीं हूं। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले विधायक हुमायूं कबीर ने दावा किया था कि उन्होंने छह बीघा जमीन खरीद ली है और छह दिसंबर को बाबरी मस्जिद का शिलान्यास होगा। उन्होंने यह भी कहा था कि समारोह में लगभग दो लाख लोगों के आने की संभावना है, और मदीना, दिल्ली, मुंबई व कोलकाता से धर्मगुरु भी शामिल होंगे।
लेकिन जमीन मालिक के ताजा बयान के बाद विधायक के दावों पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। निज़ामुद्दीन का कहना है कि विधायक सिर्फ यहां बैठ गए थे, जिससे लोगों ने मान लिया कि जमीन खरीद ली गई है। उन्होंने तंज कसा, सिर्फ बैठ जाने से जमीन खरीद नहीं ली जाती,
जमीन मालिक के बयान के बाद स्थानीय लोगों में भ्रम और चर्चा का दौर शुरू हो गया है। कई लोग पूछ रहे हैं कि जब जमीन की खरीदी-बिक्री हुई ही नहीं तो मस्जिद शिलान्यास की घोषणा कैसे कर दी गई? विधायक की घोषणा के बाद अब जमीन मालिक के विरोध और दावे ने पूरे कार्यक्रम पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। पुलिस और प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बयान बिल्कुल विपरीत हैं और मामला अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है। जमीन मालिक ने स्पष्ट कहा है कि वह किसी विवादित मुद्दे में अपना जमीन नहीं देना चाहते, जबकि विधायक हुमायूं कबीर अब तक अपने पहले दिए गए बयान पर कायम हैं या नहीं, इस पर अभी स्पष्टता नहीं है।
इस विवाद के चलते 6 दिसंबर को घोषित शिलान्यास समारोह पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।
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