यमुनापार को जिला और कोल को जनजाति में शामिल करने की मांग पर डान प्रतिबद्ध
प्रयागराज 26 नवंबर (आरएनएस )। यमुनापार को जिला घोषित करने, उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जाति की उपजाति कोल को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के साथ विधानसभा बारा और कोरांव को अनुसूचित जनजाति हेतु सुरक्षित करने के सम्बन्ध में संविधान दिवस की 76 वीं वर्षगांठ के पावन अवसर पर डा. अम्बेडकर वेलफेयर नेटवर्क (डान) के तत्वाधान में संविधान के अनुच्छेद- 17 अस्पृश्यता व छूआछूत मुक्त भारत देश के साथ साथ संविधान के अनुच्छेद-15 जातिविहीन भारत देश का निर्माण व संविधान के अनुच्छेद 39 (ख) जमीन और उद्योगों के राष्ट्रीयकरण करना तथा संविधान के अनुच्छेद 13 रूढि़वादी प्रथा को समाप्त कर वैज्ञानिक सोच को स्थापित करना आदि मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया गया।
इस अवसर पर प्रस्ताव पारित किया गया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 13, 15, 17 और 39 ख का कार्यान्वयन किया जाए ताकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के निर्धन, नि:सहाय, बेहद गरीब, भूमिहीन खेतिहर मजदूरों को उत्पादन के साधनों का सहारा मिल सके ताकि उपरोक्त अनुच्छेद प्रभावी ढंग से लागू हो सके। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के साथ कमजोर वर्गों की जमीनो, पट्टाधारकों की जमीनों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ एक अभियान के तहत सख्त कार्रवाई करके उनकी जमीनों को कब्जे से मुक्त करके उन्हें वापस दिलाया जाये।
आईपी रामबृज ने कहा कि प्रयागराज जिले की यमुनापार स्थित चार तहसीलों बारा, करछना, मेजा और कोरांव को मिलाकर एक नया जिला बनाया जाय। विधानसभा क्षेत्र बारा और विधानसभा क्षेत्र कोरांव अनुसूचित जनजाति बहुल होने की वजह से अनुसूचित जनजाति क्षेत्र बनाया जावे। प्रयागराज जिले में स्थित अनुसूचित जाति की उपजाति कोल जिसे देश के अन्य राज्यों में उन्हें अनुसूचित जनजाति का श्रेणी में रखा गया है इसीलिए उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जाति की उपजाति कोल को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में रखा जावे आदि नौ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री भारत सरकार, राज्यपाल उत्तर प्रदेश तथा मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को संबोधित ज्ञापन अपर नगर मजिस्ट्रेट को प्रस्तुत करते हुए उम्मीद किया गया है कि उपरोक्त नौ सूत्रीय मांगों पर विचार करके संबंधित विभाग को निर्देशित करें।
संविधान महोत्सव में यमुनापार की तहसील बारा और करछना स्थित सैकड़ों गांव के भूमिहीन खेतिहर मजदूर उपस्थित रहे।
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