बीजापुर, 18 अप्रैल (आरएनएस)। हीट वेव (लू) क्या करें और क्या न करें- क्या करें- जितना हो सके पर्याप्त पानी पिएं, भले ही प्यास न लगी हो। मिर्गी, हृदय, गुर्दे या लीवर से संभावित रोग वाले जो तरल प्रतिबंधित आहार लेते हो, तरल पदार्थ लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श ले। हल्के-हल्के रंग के, ढीले सूती कपड़े पहनें। ओआरएस घोल, घर का बना पेय लस्सी, बोरे बासी, चावल का पानी, नींबू का पानी, छाछ आदि का उपयोग करें। बाहर जाने से बचे। यदि बाहर जाना आवश्यक है, तो अपने सिर (कपड़े/टोपी या छाता) और चेहरे को ढकें। जहां तक संभव हो किसी भी सत्तह को छूने से बचें।
अन्य सावधानियां- जितना हो सके घर के अंदर रहें। अपने घर को ठंडा रखें धूप से बचाव के लिए रात में पर्दे, शटर का उपयोग करें और खिड़कियां खोले। निचली मंजिलों पर बने रहने का प्रयास करें।
पंखो का उपयोग करें, कपड़ों को नम करें और अधिक गर्मी में ठंडे पानी में ही स्नान करें।
यदि आप बीमार महसूस करते हैं, उच्च बुखार/लगातार सिरदर्द/चक्कर आना/मतली या भटकाव/लगातार खांसी/सांस की तकलीफ है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाये। जानवरों को छाया में रखें और उन्हें पीने के लिए भरपूर पानी दें।
क्या न करें – गर्मी के दौरान बाहर न जाएं। यदि आपको आवश्यक कार्य के लिए बाहर जाना है, तो दिन के शीतलन घंटों के दौरान अपनी सारणी निर्धारित करने का प्रयास करें। अत्यधिक गर्मी के घंटों के दौरान बाहर जाने से बचे विशेष रूप से दोपहर 12:00 बजे से 3:00 बजे के नंगे पैर या बिना चेहरे को ढके और बिना सिर ढककर बाहर न जाएं।
व्यस्तम समय (दोपहर) के दौरान खाना पकाने से बचें। खाना पकाने वाले क्षेत्रों (रसोई घरों) में दरवाजे और खिड़कियां खोल कर रखे, जिससे पर्याप्त रूप से हवा आ सके। शराब, चाय, कॉफी और कार्बोनेटेड पेय, पीने से बचें जो शरीर को निर्जलित करते हैं।
उच्च प्रोटीन, मसालेदार और तेलीय भोजन खाने से बचें, बासी खाना न खाएं। बीमार होने पर बाहर धूप में न जाएं, घर पर रहे!
नियोक्ता और श्रमिक-, क्या करें- कार्यस्थल पर स्वच्छ और ठंडा पेयजल प्रदान करें। श्रमिकों को सीधे धूप से बचने के लिए सावधानी बरतें। यदि उन्हें खुले में काम करना पड़ता है जैसे कि कृषि मजदूर, मनरेगा मजदूर, आदि तो सुनिश्चित करें कि ये हर समय अपना सिर और चेहरा ढके रहे। दिन के समय निर्धारित समय सारणी निश्चित करें। खुले में काम करने के लिए विश्राम गृह की अवधि और सीमा बढ़ाएं।
गर्भवती महिलाओं या कामगारों की चिकित्सकीय स्थिति पर विशेष ध्यान दें।
यदि कोई बीमार है तो उसे डयूटी पर्यवेक्षक ष्ठह्वह्ल4 स्ह्वश्चद्गह्म्1द्बह्यशह्म् को सूचित किया जाना चाहिए।
क्या न करें- कार्यस्थल पर, धूम्रपान या तंबाकू न ही थूके और न ही चबाएं।
जो लोग बीमार हैं उनके निकट संपर्क से बचें। बीमार होने पर काम पर न जाएँ घर पर ही रहें।
लू (तापघात) प्रबंधन एवं बचाव- लू के लक्षण, सिर में भारीपन और दर्द होना। तेज बुखार के साथ मुंह का सूखना। चक्कर और उल्टी आना। कमजोरी के साथ शरीर में दर्द होना। शरीर का तापमान अधिक हो जाने के बाद भी पसीने का न आना। अधिक प्यास और पेशाब कम आना। भूख कम लगना।
बेहोश होना।
लू से बचाव के उपाय- लू लगने का प्रमुख कारण तेज धूप और गर्मी में ज्यादा देर तक रहने के कारण शरीर में पानी और खनिज मुख्यत: नमक की कमी हो जाना होता है। अत: इससे बचाव के लिए निम्न बातों का ध्यान रखाना चाहिए:-बहुत्त अनिवार्य न हो तो घर से बाहर ना जायें। धूप में निकलने से पहले सर व कानों को कपड़े से अच्छी तरह से बांध लें। पानी अधिक मात्रा में पीयें। अधिक समय तक धूप में न रहें। गर्मी के दौरान नरम मुलायम, सूती कपड़े पहनने चाहिए ताकि हवा और कपड़े पसीने को सोखते रहे। अधिक पसीना आने की स्थिति में ओआरएस घोल पीयें। चक्कर आने, उल्टी आने पर छायादार स्थान पर विश्राम करें तथा शीतल पेय जल अथवा उपलब्ध हो तो फल का रस, लस्सी, मठा आदि का सेवन करें। प्रारंभिक सलाह के लिए 104 आरोग्य सेवा केन्द्र से नि:शुल्क परामर्श लिया जावे।
उल्टी, सर दर्द, तेज बुखार की दशा में निकट के अस्पताल अथवा स्वास्थ्य केन्द्र से जरूरी सलाह लिया जावे।
लू लगने पर किये जाने वाला प्रारंभिक उपचार- बुखार पीडि़त व्यक्ति के सर पर ठण्डे पानी की पट्टी लगायें। अधिक पानी में पेय पदार्थ पिलाये जैरो कच्चे आम का पना, जल जीरा आदि। पीडि़त व्यक्ति को पंखे के नीचे हवा में लिटा देवें। शरीर पर ठण्डे पानी का छिड़काय करते रहें।
पीडि़त व्यक्ति को यथाशीघ्र किसी नजदीकी चिकित्सा केन्द्र में उपचार हेतु ले जायें। मितानिन, एएनएम से ओआरएस के पैकेट हेतु संपर्क करें।
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