फेशियल अटेंडेंस प्रणाली थोपने के विरुद्ध दायर वाद पर उच्च न्यायालय में हुई महत्वपूर्ण सुनवाई
लखनऊ/प्रयागराज 26 नवंबर (आरएनएस )। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड एवं उसके अंतर्गत सभी वितरण निगमों में कार्यरत फील्ड कर्मचारियों पर निजी मोबाइल फोन से फेशियल अटेंडेंस लागू करने के अनुचित दबाव के विरुद्ध दायर वाद पर दिनांक 20.11.2025 कों उच्च न्यायालय, इलाहाबाद की द्वि-सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष महत्वपूर्ण सुनवाई हुई, जिसका लिखित निर्णय आज आया है।
उच्च न्यायालय मे सुनवाई के दौरान राविप प्राविधिक कर्मचारी संघ, उत्तर प्रदेश की ओर से प्रस्तुत किया कि ऊर्जा प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों पर निजी मोबाइल फोन से फेशियल अटेंडेंस लागू करने का अनावश्यक दबाव डाला जा रहा है। फेशियल अटेंडेंस न लगाने वाले कर्मचारियों का वेतन रोकना, निलंबन का भय दिखाना, दूरस्थ स्थानांतरण, विभागीय जांच तथा अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाइयां श्रमिक अधिकारों एवं मानवीय गरिमा का उल्लंघन हैं। साथ ही यह व्यवस्था कर्मचारियों के निजता के अधिकार (अनुच्छेद 21) तथा सम्मानजनक कार्य-परिस्थिति के संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है।
वाद मे राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अपर महाधिवक्ता कार्तिकेय शरण द्वारा न्यायालय को आश्वासन दिया गया कि फेशियल अटेंडेंस के आधार पर रोका गया सभी कर्मचारियों का वेतन जारी किया जा चुका है, साथ ही जिनका वेतन शेष है, उसे भी त्वरित रूप से जारी किया जा रहा है। यह भी आश्वस्त किया गया कि फेशियल अटेंडेंस न लगाने के कारण किसी भी कर्मचारी के विरुद्ध वेतन रोकना, निलंबन, स्थानांतरण, विभागीय जांच आदि अन्य किसी भी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है तथा पूर्व में की गई सभी कार्रवाइयां समाप्त कर दी गई हैं।
वादी सत्यनारायण उपाध्याय ने बताया कि भविष्य में यदि केवल फेशियल अटेंडेंस न लगाने के कारण किसी भी कर्मचारी पर प्रतिकूल कार्रवाई की गई, तो माननीय न्यायालय मे ऐसे मामलों कों उपस्थित कर न्याय की गुहार लगाई जायगी और माननीय न्यायालय के आदेशों की अनदेखी के विरुद्ध अवमानना वाद के लिए भी विचार किया जायगा।
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