रायपुर 26 नवंबर 2025(आरएनएस) छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने आज प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) कार्यालय द्वारा आयोजित ऑडिट पखवाड़ा के तहत बजट नियंत्रण अधिकारियों, कोषागार अधिकारियों और आहरण एवं संवितरण अधिकारियों के लिए कार्यशाला का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम सीएजी द्वारा 20 नवंबर से 9 दिसंबर तक चल रहे ‘ऑडिट दिवस’ का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन में ऑडिट की भूमिका को रेखांकित करना है।
वित्त मंत्री चौधरी ने कहा कि 2004 से 2014 तक देश नीतिगत पंगुता और आर्थिक संकट से जूझ रहा था, जबकि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुए त्वरित सुधारों ने देश की कमजोर अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित किया। उन्होंने कहा कि भारत आज सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और जल्द ही विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, साथ ही वह पहले ही ब्रिटेन को पीछे छोड़ चुका है।
उन्होंने बताया कि जीएसटी लागू होने से देश में कर प्रणाली सरल और एकरूप हुई, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कैग की भूमिका अब केवल व्यय निरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि योजनाओं के वास्तविक परिणामों और प्रभावों के मूल्यांकन पर केंद्रित हो गई है।

इस अवसर पर प्रधान महालेखाकार यशवंत कुमार ने वित्त विभाग और एजी कार्यालय के बीच सहयोग को सुशासन के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने मासिक सिविल खाता संकलन की समयसीमा 25 से घटाकर 10 तारीख तक करने, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को समय पर जीपीएफ भुगतान सुनिश्चित करने और ई-कुबेर व पीएफएमएस जैसी डिजिटल प्रणालियों से लेखांकन प्रक्रियाओं को अधिक सक्षम बनाने का उल्लेख किया। उन्होंने अधिकारियों से छत्तीसगढ़ को वित्तीय अनुशासन का आदर्श राज्य बनाने में सहयोग की अपील की।
कार्यक्रम में वित्त विभाग की विशेष सचिव शीतल शाश्वत वर्मा, पेंशन एवं कोषागार की निदेशक पद्मिनी भोई साहू सहित एजी कार्यालय और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।


















