01 करोड़ 45 लाख से अधिक गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन पूर्ण
रायपुर, 27 नवंबर (आरएनएस)। राजधानी में इस समय मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का काम तेजी से चल रहा है। 2003 की मतदाता सूची में नाम खोजने के लिए इस समय मतदाता विशेष रूप से परेशान हैं। बीएलओ भी इस समय अपना प्राण बचाते फिर रहे हैं। उनका कहना है कि कब 5 दिसम्बर आए और प्राण बचे।
मिली जानकारी के अनुसार राजधानी में इस समय बीएलओ दोहरा दबाव महसूस कर रहे हैं। बड़ी संख्या में फार्म अपलोड करने से सर्वर बैठ जाता है, अपलोड करने का काम रात में करके ठीक किया जाता है। शिक्षकों पर कोर्स पूरा करने का दायित्व है। यदि किसी मतदाता का नाम दो बूत में है तो उसे अपने तरफ से ही फार्म वापस करना पड़ता है, जिसके कारण मतदाता परेशान है, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता इस काम में कोई विशेष रूची नहीं नहीं ले रहे हैं। इधर आयोग के पास कोई नामांकन सिर्फ इस लिए स्वीकार करने के बाध्य किया गया। आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है। अगर किसी मतदाता का नाम हटाया जाएगा तो उसकी सूचना दिया जाएगा।
सीईओ छत्तीसगढ़ से मिली जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ में अर्हता तिथि 01 जनवरी 2026 के लिए मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान की प्रगति लगातार तेजी से बढ़ रही है। प्रदेशभर में 04 नवम्बर 2025 से प्रारंभ हुए इस महत्वपूर्ण अभियान के तहत बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर गणना प्रपत्रों का संग्रहण एवं डिजिटलाइजेशन कार्य पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है।
पंजीकृत मतदाओं की मतदाताओं की संख्या हुई 69 प्रतिशत
प्रदेश में लगभग 01 करोड़ 45 लाख से अधिक गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन पूरा किया जा चुका है, जो कुल 02 करोड़ 12 लाख 30 हजार 737 पंजीकृत मतदाताओं में से लगभग 69 प्रतिशत है।
आर. शर्मा
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