बाबरी मस्जिद के ऐलान के बीच गीता पाठ सह शौर्य दिवस की तैयारी
कोलकाता 27 नवंबर (आरएनएस)। बंगाल में ममता सरकार के लिए छह दिसंबर सिर दर्द बन सकता है। वैसे भी इस दिन बंगाल में राज्य सरकार अलर्ट रहती है लेकिन इस साल को मुर्शिदाबाद में कथित व प्रस्तावित बाबरी मस्जिद के नींव स्थापित करने के ऐलान के कारण पश्चिम बंगाल का राजनीतिक तापमान अचानक तेजी से बढ़ गया है। एक तरफ टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर की बाबरी मस्जिद निर्माण से जुड़ी घोषणा पर विवाद गहराता जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ गीता जयंती को लेकर सनातन संगठनों की तैयारी तेज हो गई है। इन दोनों घटनाओं के साथ उसी दिन टीएमसी की बड़ी राजनीतिक रैली भी होनी है। इसके अलावा कहा जा रहा है कि, तमाम सनातनी संगठनों के द्वारा इस दिन कई धार्मिक आयोजन होंगे व कई संगठन इसे शौर्य दिवस के रूप में मनाते हैं। वैसे टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर ने ही कुछ दिन पहले बयान दिया था-
जब कोई पुरी से जगन्नाथ मंदिर दीघा ले आएगा तो कोई कुछ नहीं कहेगा। जब पार्टी कार्यालय में पूजा होती है तो कोई विरोध नहीं करता, फिर बाबरी मस्जिद से क्या समस्या है?
मामले पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि यह कदम राज्य को तोडऩे की तरफ ले जा रहा है। उनके मुताबिक, अगर कोई देश में बाबरी मस्जिद फिर से बनाने की बात करेगा तो देश चुप नहीं बैठेगा। भाजपा ने इसे तुष्टीकरण की राजनीति बताते हुए टीएमसी को कटघरे में खड़ा किया। टीएमसी ने तुरंत दूरी बनाते हुए स्पष्ट किया कि कबीर का बयान पार्टी की आधिकारिक लाइन नहीं है। किसी भी धार्मिक मुद्दे पर आधिकारिक स्टैंड सिर्फ नेतृत्व द्वारा तय किया जाता है। इसी बीच निर्गुणानंद महाराज ने कहा कि देश में मंदिर या मस्जिद बनाने पर रोक नहीं है, लेकिन विवाद नाम को लेकर है। उनका कहना था, ‘अब्दुल कलाम के नाम से भी मस्जिद बन सकती थी, शिकायत बाबर के नाम को लेकर है।Ó उन्होंने यह भी बताया कि संसद के माध्यम से गीता जयंती के चार साल पूरे होने पर कई बड़े कार्यक्रमों की तैयारी चल रही है। बता दे कि, बारी मस्जिद विध्वंश के दिन 6 दिसम्बर को शौर्य दिवस और शहीदी दिवस पर पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नीव रखने के टीएमसी के विधायक हुमायू कबीर के ऐलान के बाद आगरा में आगरा में हिंदूवादी नेताओं ने हुमायू कबीर के लिए कब्र खोद कर रख ली है, और कबीर को जिन्दा या मुरदा लाने पर 1 करोड़ का इनाम में देने का ऐलान किया है।
Login
अपनी भाषा में समाचार चुनने की स्वतंत्रता | देश की श्रेष्ठतम समाचार एजेंसी

