नई दिल्ली , 28 नवंबर (आरएनएस)। जैसे-जैसे भारत बजट 2026 की तैयारी कर रहा है, यह स्पष्ट हो गया है कि वर्चुअल डिजिटल संपत्तियों (वीडीए) को लेकर देश की कर नीति पर पुनर्विचार करना बेहद जरूरी है। वर्तमान में, वीडीए से होने वाले लाभ पर 30त्न टैक्स और 1त्न स्रोत पर कटौती (टीडीएस) लागू है। इसे सरकार ने लेन-देन का पता लगाने के उद्देश्य से पेश किया था। लेकिन इस ढांचे ने कई अनपेक्षित परिणाम दिए। इसका असर यह हुआ कि ट्रेडिंग गतिविधियों का एक बड़ा हिस्सा विदेशी प्लेटफॉर्म की ओर चला गया, घरेलू एक्सचेंजों से तरलता कम हुई और नेट राजस्व अपेक्षा से कम रहा। इसके बावजूद, भारत में वीडीए को अपनाने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती रही।
टीआईओएल नॉलेज फाउंडेशन की रिपोर्ट इस विरोधाभास को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। वित्त वर्ष 2022-23 में टीडीएस प्रणाली के पहले कुछ महीनों के दौरान सरकार ने केवल ?158 करोड़ वसूल किए। वित्त वर्ष 2023-24, यानी इस प्रणाली के पहले पूरे वर्ष में, यह राशि बढ़कर ?180 करोड़ हुई। इसी अवधि में, वीडीए से कुल पूंजीगत लाभ कर लगभग ?706.52 करोड़ रहा। वित्त वर्ष 2024-25 के लिए अनुमान है कि घरेलू एक्सचेंज लगभग ?450 करोड़ टीडीएस जमा करेंगे। यह पिछले दो वर्षों की तुलना में करीब 35त्न अधिक है। इस बढ़ोतरी का कारण आंशिक रूप से भारत में वीडीए अपनाने की तेज़ी और आंशिक रूप से वैश्विक क्रिप्टो बाजार की मजबूती है, जिसकी कुल मूल्य अब लगभग 3.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है। हालांकि, ये आंकड़े पूरी कहानी नहीं बताते। बजट 2026 को राजस्व और विनियमन के बीच चयन करने की आवश्यकता नहीं है। असली विकल्प यह है कि भारत एक अस्पष्ट प्रणाली को बनाए रखे या निगरानी और निष्पक्षता पर आधारित ढांचे की दिशा में बढ़े। एक स्मार्ट, वैश्विक स्तर पर संरेखित और प्रशासनिक रूप से व्यावहारिक ढांचा भारत की क्रिप्टो नीति को दंड से भागीदारी की ओर ले जाएगा और देश को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में उसका सही स्थान दिलाएगा।
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