मुर्शिदाबाद 28 नवंबर (आरएनएस)। एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग व बंगाल की ममता बनर्जी सरकार के बीच भीषण तौर पर ठन गई है। बंगाल की ममता सरकार के अनुसार काम के दबाव के कारण एक और बीएलओ की मौत हुई है। वहीं दावा किया जा रहा है कि, अबतक एसआईआर को लेकर मृतकों के संख्या कुल 33 हो गई है। वहीं मुर्शिदाबाद जिले में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) के काम के बोझ की वजह से कथित तौर पर एक बूथ लेवल ऑफि़सर (बीएलओ) की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई। बीएलओ की मौत गुरुवार रात को हुई और उसकी पहचान जाकिर हुसैन के तौर पर हुई, जो एक लोकल सरकारी प्राइमरी स्कूल में टीचर था। उसके परिवार वालों ने दावा किया कि वह एसआईआर एक्सरसाइज़ और टीचिंग असाइनमेंट की वजह से बहुत ज़्यादा प्रेशर में था। उस पर प्रेशर तब और बढ़ गया जब जिस सरकारी प्राइमरी स्कूल से वह जुड़ा था, वहाँ के अधिकारियों ने उसे रिलीव करने से मना कर दिया, जिससे उसकी परेशानियाँ और बढ़ गईं। परिवार वालों के मुताबिक, हुसैन ने गुरुवार दोपहर को दिल में तेज़ दर्द की शिकायत की, जिसके बाद उसे तुरंत एक लोकल हॉस्पिटल ले जाया गया। हालांकि, डॉक्टरों की उसे इस मुश्किल से निकालने की सारी कोशिशें आखिरकार नाकाम रहीं, और गुरुवार रात उसकी मौत हो गई।
इससे पहले, पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दवान जिले के बर्दवान में एक बीएलओ की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी, ऐसा कहा जा रहा है कि एसआईआर से जुड़े काम के बोझ की वजह से ऐसा हुआ था। नदिया जिले के छपरा और जलपाईगुड़ी जिले के मालबाजार में दो और बीएलओ ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली, ऐसा कहा जा रहा है कि एसआईटी से जुड़े काम के दबाव की वजह से ऐसा हुआ। पश्चिम बंगाल में बीएलओ की मौतों और आत्महत्याओं को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि उन्होंने बीएलओ पर बेवजह काम का बोझ डाला है, क्योंकि रिवीजन का काम उन पर बिना प्लान के थोपा गया था। दूसरी तरफ, बीजेपी ने दावा किया था कि बीएलओ पर दबाव एसआईआर से जुड़े काम के बोझ की वजह से नहीं था, बल्कि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और राज्य प्रशासन की तरफ से अपनी मजऱ्ी से रिवीजन करने के लिए बेवजह दबाव था।
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