पाक के जेल में बंद 194 मछुआरों देख रहें हैं वतन लौटने का सपना
जगदीश यादव
कोलकाता/पूर्व मेदिनीपुर 30 नवंबर (आरएनएस)। पाकिस्तान की जेल में चार साल से बंद यूपी स्थित जौनपुर के मछुआरे घुराहू बिंद की मौत का मामला अभी ठण्डा भी नहीं हुआ कि, अब पाकिस्तानी जेल में पश्चिम बंगाल के एक मछुआरे स्वप्न राणा की रहस्यमयी मौत से तमाम सवाल खड़े हे गए है। वैसे पाक जेल में औप भी कई भारतीय मछुआरे कैद हैं। ऐसे में इनकी रिहाई के लिए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी मदद की गुहार लगाई है। लेकिन इससे पहले की कुछ होता एक और मछुआरे स्वप्न राणा की रहस्यमयी मौत हो गई। अधिकारिक जानकारी में बताया गया है कि,
बंगाल के मृत मछुआरा स्वप्न राणा है पूर्व मेदिनीपुर जिले के कांथी उत्तर विधानसभा क्षेत्र के पाइकबाड़ गांव का रहने वाला था। मछुआरे की मौत की खबर से परिवार में शोक की लहर है। खबर के लिखे जाने तक मृतक का पार्थिव शरीर भारत वापस लाने के लिए कार्यवाही की जा रही थी। पाइकबाड़ गांव निवासी स्वप्न राणा मछली पकडऩे के दौरान अनजाने में जल सीमा पार कर पाकिस्तान में प्रवेश कर गए थे। उन्हें पाकिस्तान की समुद्री पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। करीब दो वर्ष तक बंदी रहने के बाद अचानक उनके निधन की सूचना परिवार तक पहुंची। मछुआरे के निधन की सूचना आधिकारिक रूप से परिवार को जिला प्रशासन ने दी। जिला प्रशासन ने बताया कि सरकार के स्तर पर मछुआरे का पार्थिव शरीर भारत लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विदेश मंत्रालय के साथ लगातार संपर्क रखा जा रहा है, ताकि यथासंभव जल्द से जल्द पार्थिव शरीर को भारत लाया जा सके। परिवार और स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वप्न राणा की मौत का कारण अब तक साफ नहीं है। बंदी स्थिति में उन्हें कैसी चिकित्सा, सुरक्षा या व्यवहार मिला, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसी कारण उनकी मौत को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। पूर्व मेदिनीपुर जिला मछुआरा विकास समिति के अध्यक्ष अमीन सोहेल ने स्वप्न राणा के परिजनों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा है कि स्वप्न राणा हमारे मछुआरा समाज का एक सदस्य था। परिवार को अकेला नहीं छोड़ेंगे। प्रशासन के साथ समन्वय कर हर तरह की मदद करेंगे। उन्होंने बताया कि एक जुलाई 2025 को पाकिस्तान ने विदेशी कैदियों की जो सूची भारत सरकार को भेजी, उसमें हमने स्वप्न को पहचाना। अचानक दो दिन पहले भारत सरकार ने जिलाशासक के माध्यम से उसके निधन की सूचना भेजी। स्थानीय लोगों के अनुसार स्वप्न राणा मेहनती और शांत स्वभाव के व्यक्ति थे। वैसे पाक जेल में कैद तमाम मछुआरों के परिजन यह आरोप लगाते रहें हैं कि पाकिस्तान के जेल में प्रताडऩा से तंग आकर आत्महत्या की घटना कोई हैरत की बात नहीं है। इसी तरह से कुछ आरोप जौनपुर के निवासी व पाकिस्तान की कैद में रह रहे घुराहू बिंद की मौत पर भी उसके परिजनों ने लगाया है। भारत-पाक मामलों के जानकारों के मानना है कि पाकिस्तान की फौज हो या फिर पुलिस या वहां के अधिकारी वह लोग मानवता नाम की कोई चीज से जैसे कोई सरोकार ही नहीं रखते हैं। ऐसे में अगर घुराहू बिंद व स्वप्न राणा के मौत के पीछे पाकिस्तान की अमानवीय व्यवस्था व क्रूर तंत्र हो तो हैरत की बात नहीं होगी। बहरहाल बता दे कि, आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान की जेल में अभी 194 मछुआरे बंद हैं जिनमें से 123 गुजरात के हैं। सरकार ने कहा कि साल 2021 में 33 मछुआरे, साल 2022 में 68 मछुआरे, साल 2023 में 9 मछुआरे और साल 2024 में 13 मछुआरे पकड़े गए हैं।
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