भाजपा ने किया एसआईआर प्रकिया का समर्थन
कोलकाता। देश के राज्यों और केंद्र शासित 12 प्रदेशों में चल रहे तीन-स्टेज वाले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को सात दिनों के लिए बढ़ा दिया है। ऐसे में इस फैसले से खासकर बंगाल में राजनीतिक हंगामा मच गया है। भाजपा का कहना है कि यह कमीशन का पूरी तरह से स्वतंत्र फैसला है। वहीं तृणमूल का आरोप है कि चुनाव आयोग एसआईआर के साथ ‘खेलÓ रहा है। एसआईआर को लेकर पूरे देश में सबसे ज्यादा हंगामा बंगाल में हो रहा है। कहा जा रहा है कि एसआईआर जल्दीबाजी में किया जा रहा है और ऐसे में काम के दवाब से बंगाल में 33 से अधिक बीएलओ की मौत हो चुकी है। भले ही कथित तौर पर देश के चुनाव आयोग ने आज खासकर बंगाल को कथित तौर पर राहत दी है। लेकिन बंगाल में एसआईआर को लेकर एक दूसरे की कट्टर विरोधी तृणमूल व वाममोर्चा ने उक्त मुद्दे पर चुनाव आयोग को घेरा व मंशा पर सवाल खड़े किए है। मेयर फिरहाद हकीम के शब्दों में, कई जानें गईं। फिर समय बढ़ा दिया गया। हमारे लड़के दिन-रात काम कर रहे हैं। लेकिन अगर रेफरी निष्पक्ष नहीं हुआ, तो फ़ुटबॉल पर पैर लगते ही वह मैदान बाहर हो जाएगी!
बंगाल की सत्तारुढ़ पार्टी तृणमूल का दावा है कि बीजेपी ने पहले ही कमीशन को 1.2 करोड़ नाम हटाने का टारगेट दिया है। अब, क्योंकि वह टारगेट पूरा नहीं हुआ है, इसलिए एक्स्ट्रा टाइम दिया जा रहा है। तृणमूल के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा, क्या यह कोई खेल का मैदान है? क्या यह तब तक चलता रहेगा जब तक भाजपा के कहने पर 1.2 करोड़ नाम नहीं हटा दिए जाते? लेकिन तृणमूल के बीएलए हर जोन में पहरा दे रहे हैं। सारी जानकारी हमारे ऐप में भी रिकॉर्ड है। इसलिए, कोई भी हेराफेरी पकड़ी जाएगी। सिफऱ् तृणमूल ही नहीं, वाममोर्चा ने भी चुनाव आयोग के रोल पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि डिजिटाइजेशन के पहले फेज में सही ट्रेनिंग और गाइडलाइंस न होने की वजह से बीएलओ को दिक्कतें आ रही हैं। माकपा के वरीय नेता मोहम्मद सलीम ने कहा, फॉर्म कैसे भरना है, इसकी कोई ट्रेनिंग नहीं है! लोगों को एडवर्टाइजमेंट के जरिए भी नहीं बताया गया है। हर दिन नए इंस्ट्रक्शन आ रहे हैं, बीएलओ का काम कर रहें लोगों की हालत बहुत खराब है। हालांकि, बीजेपी का सुर अलग है। उन्हें प्रेसिडेंट रूल लगाकर एसआईआर कर देना चाहिए।

