जगदीश यादव
कोलकाता 1 दिसंबर (आरएनएस)। कई दशक पहले पंकज उधास ने के लब से यह गीत निकले थे कि, हुई महंगी बहुत ही शराब के थोड़ी थोड़ी पिया करो, पियो लेकिन रखो हिसाब। यह गजल तब से आजतक देश दुनिया में हर रोज गूंजती है। शराब पीने का हिसाब कितने लोग रख पाते हैं यह तो शोध या सर्वेक्षण का विषय हो सकता। लेकिन अब बंगाल की ममता सरकार आज से बंगाल में शराब की दाम में बढ़ोतरी लागू दिया है। नए नियम के तहत राज्य में नया आबकारी शुल्क प्रभावी हो गया है। पश्चिम बंगाल के आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि बीयर को छोड़कर देशी व विदेशी सभी तरह की शराब पर अतिरिक्त टैक्स लगाया गया है। इस बारे में आबकारी विभाग ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है। जिसमे कहा गया है कि,कि 750 एमएल की बोतल की कीमत 30 से 40 रुपये तक बढ़ सकती है। वहीं, छोटी बोतल यानी 180 एमएल की कीमत 10 रुपये तक बढ़ सकती है। कहना गलत नहीं होगा कि, अब से शराब पीने के शौकीनों को शराब पीने के लिए अधिक पैसे देने होंगे।
आबकारी विभाग ने शराब बेचने वालों को साफ-साफ बता दिया है कि दुकानों को अधिसूचना के हिसाब से ही शराब बेचनी होगी। उन्हें कम कीमत पर बेचने की इजाजत नहीं होगी। अगर इस नियम को तोड़ा गया तो बेचने वाले पर जुर्माना लग सकता है। लाइसेंस भी रद्द हो सकता है। बता दे कि शराब के दर में बढ़ोत्तरी से बंगाल में का राजस्व-आय बढ़ेगा। एक्सपट्र्स के मुताबिक, इस कीमत बढ़ोतरी से सरकार को असल में सालाना 4000 करोड़ रुपये ज्यादा मिलेंगे। इसलिए, डिपार्टमेंट के कुछ अधिकारियों का मानना है कि एक्साइज पॉलिसी में बदलाव किया गया है। आज से पुराने स्टॉक समेत नया माल भी नई कीमतों पर ही बेचा जाएगा। इसके लिए प्रत्येक बोतल पर नई कीमत का स्टीकर लगाना अनिवार्य है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले चुनावों से पहले राज्य की राजस्व-आय बढ़ाने के उद्देश्य से ममता बनर्जी सरकार ने यह कदम उठाया है। वैसे राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि बढ़े हुए राजस्व का उपयोग सरकार विकास योजनाओं में आवंटित कर सकती है। अगले साल चुनाव से पहले राज्य सरकार का अंतरिम बजट पेश होना है, जिसमें इस अतिरिक्त आय को विकास परियोजनाओं में खर्च करने की घोषणा की जा सकती है। यही वजह बताई जा रही है कि राज्य में शराब के दामों में वृद्धि की गई है। बहरहाल भारत में शराब की कीमतें हर राज्य में अलग-अलग होती हैं। कुछ राज्यों में शराब काफी ज्यादा महंगी है। इसका मुख्य कारण हाई एक्साइज ड्यूटी और टैक्स है। तेलंगाना-आंध्र प्रदेश में शराब पर लोग सबसे ज्यादा खर्च करते हैं। इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अनुसार, कर्नाटक में शराब पर कुल 83 प्रतिशत टैक्स लगाया जाता है, जो इसे पूरे देश में सबसे महंगा राज्य बनाता है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के स्टडी के अनुसार, शराब पर प्रति व्यक्ति खर्च के मामले में कुछ राज्य सबसे आगे हैं। इनमें तेलंगाना पहले नंबर पर है, जहां औसतन 1,623 रुपए प्रति व्यक्ति सालाना खर्च है। इसके बाद आंध्र प्रदेश 1,306 रुपए और पंजाब 1,245 रुपए हैं।
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