भिलाई, 02 दिसंबर (आरएनएस)। नंदनवन जंगल सफारी रायपुर से इन-ब्रीडिंग रोकने और बायोडायवर्सिटी बढ़ाने के उद्देश्य से मैत्रीबाग लाई गई सफेद बाघिन जया ने सोमवार सुबह दम तोड़ दिया। 11 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद 20 मार्च 2024 को बाघिन जया को जंगल सफारी से मैत्रीबाग भेजा गया था। लेकिन यहां का माहौल उसे रास नहीं आया और उसकी गर्जना पिंजरे में कैद होकर रह गई।
मैत्रीबाग के प्रभारी डॉ. एन.के. जैन ने बताया कि पोस्टमार्टम में उसका अमाशय फटा पाया गया है। आशंका है कि बाड़े में उछलते समय उसका अमाशय पलट गया जिससे फटने की स्थिति बन गई। शेर प्रजाति में ऐसे हादसे जंपिंग के दौरान हो सकते हैं और 45 मिनट के भीतर उनकी मौत हो जाती है। रविवार रात तक जया बिल्कुल सामान्य थी, लेकिन सुबह उसकी मृत्यु की खबर मिली।
जया के बदले मैत्रीबाग से सफेद बाघिन रक्षा को जंगल सफारी रायपुर भेजा गया था। लगभग 609 दिनों तक जया मैत्रीबाग के बाड़े में रही और रक्षा खुले जंगल में। लेकिन 610वें दिन की सुबह जया की दहाड़ हमेशा के लिए शांत हो गई।
जया के पोस्टमार्टम का कार्य पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय अंजोरा के डॉ. जसप्रीत सिंह और राज्य पशु चिकित्सा विभाग के डॉ. आर.के. गुप्ता ने किया। बाद में मैत्रीबाग परिसर में ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
पिछले 10 वर्षों में 5 अन्य बाघों की भी हो चुकी है मौत
सफेद बाघिन जया से पहले भी मैत्रीबाग में कई बाघों की मौत दर्ज है—
2014 और 2015 में बाघिन दुर्गा और नर्मदा,
2019 में बंगाल टाइगर सतपुड़ा,
2021 में वसुंधरा,
2022 में कैंसर पीडि़त सफेद बाघ किशन की मौत हुई।
देश में सफेद बाघों की संख्या करीब 160 — मैत्रीबाग ने दिए 19 बाघ
देशभर में सफेद बाघों की अनुमानित संख्या लगभग 160 है, जिनमें से 19 बाघ मैत्रीबाग से अन्य स्थानों को भेजे गए हैं। जया की मौत के बाद अब मैत्रीबाग में केवल 6 बाघ शेष रह गए हैं। 1998 में यहां शेर प्रजाति के संरक्षण की शुरुआत हुई थी, जब नंदनकानन जू भुवनेश्वर से आए जोड़े ‘तापसीÓ और ‘नामÓ ने पहली बार दो शावकों को जन्म दिया था। तभी से इन-ब्रीडिंग रोकने और जैव विविधता बनाए रखने के लिए बाघों का आदान प्रदान जारी है। यह घटना मैत्रीबाग प्रबंधन और वन्यजीव प्रेमियों के लिए बेहद दुखद है।
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