नईदिल्ली,02 दिसंबर (आरएनएस)। दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चलाई गई एक डॉक्यूमेंट्री के लिए ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) के खिलाफ 10,000 करोड़ रुपये के मानहानि के मामले में बार-बार स्थगन मांगने को लेकर गुजरात स्थित गैर-लाभकारी संस्था (एनजीओ) जस्टिस ऑन ट्रायल को फटकार लगाई है। कोर्ट ने एनजीओ को मामले को सुनवाई योग्य होने के पीछे तर्क देने के लिए अब आखिरी मौका दिया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में निर्धारित की है।
जस्टिस अमित बंसल ने कहा कि यह मामला 2023 का था और कोर्ट ने मामले की सुनवाई पर सवाल उठाए थे। हालांकि, तब से वादी ने बार-बार स्थगन की मांग की है। न्यायालय ने कहा कि वह एनजीओ को यह तर्क देने का अंतिम अवसर देगा कि मामला किस प्रकार स्वीकार्य है। उसके बाद मामले का निस्तारण किया जाएगा। एनजीओ वकील ने कहा कि स्थगन मांगने का कारण एक वरिष्ठ व्यक्ति को नियुक्त करने की प्रक्रिया जारी होना है।
अप्रैल 2023 में बीबीसी ने प्रधानमंत्री मोदी को लेकर दो भागों में इंडिया: द मोदी क्वेश्चन शीर्षक से डॉक्यूमेंट्री प्रसारित की थी। इसमें गुजरात दंगों को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसको लेकर एनजीओ ने दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि का दावा करते हुए तर्क दिया था कि बीबीसी की दो भागों वाली डॉक्यूमेंट्री ने भारत, इसकी न्यायपालिका और प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा पर कलंक लगाया है। उसने बीबीसी से 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान करने की मांग की थी।
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