नई दिल्ली,02 दिसंबर (आरएनएस)। दिल्ली हाईकोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए तात्कालिक और दीर्घकालिक उपाय करने का दिशानिर्देश जारी करने की मांग वाली याचिका पर तीन दिसंबर को सुनवाई करेगा. मंगलवार को यह मामला जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच के समक्ष लिस्टेड था. जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच ने कहा कि ये मामला जनहित से जुड़ा हुआ है, इसलिए संबंधित बेंच ही इस पर सुनवाई करेगी.
दरअसल, चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करती है. हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए तात्कालिक और दीर्घकालिक उपाय करने का दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई है. याचिका ग्रेटर कैलाश पार्ट 2 वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से महासचिव संजय राणा ने दायर किया है.
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में वायु खतरनाक श्रेणी में होने के बावजूद ग्रैप-3 हटा दिया गया. ग्रैप-3 हटाने के पहले प्राधिकरणों ने स्थिति को बिगडऩे से बचाने के लिए समय पर जरुरी कदम नहीं उठाये हैं, जिसकी वजह से स्थिति और बिगडऩे की आशंका है.
याचिका में आगे कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने समय रहते कदम नहीं उटाया जिसकी वजह से यहां के लोगों की जिंदगी खतरे में आ गयी है. दिल्ली में हेल्थ इमरजेंसी की स्थिति आ गयी है. याचिका में ये भी कहा गया है कि दिल्ली में लगातार वायु प्रदूषण से लोगों के फेफड़ों पर काफी असर पड़ता है और इससे दिल्ली के लोगों की तबीयत खराब हो रही है. वायु प्रदूषण को रोकने के लिए जो वर्तमान में उपाय किए जाने चाहिए वे नहीं किए जा रहे हैं. वायु प्रदूषण रोकने के लिए निर्माण और डेमोलिशन पर खास नजर रखना होगा, क्योंकि इससे धूल बढ़ती है.
इसके अलावा सड़कों की धूल, वाहनों से उत्सर्जन और औद्योगिक ईकाईयों से उत्सर्जन को भी कम करने पर ध्यान देना होगा. अंत में याचिका में कहा गया है कि दिल्ली में खुले में कचरा जलाने पर भी पूरे तरीके से रोक लगाना होगा. दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए कॉम्प्रिहेंसिव क्लीन एयर एक्शन प्लान बनाने की जरुरत है, जिसमें समयबद्ध तरीके से वायु प्रदूषण रोकने और एक्यूआई में सुधार पर जोर देना होगा.
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