प्रयागराज 3 दिसंबर (आरएनएस )। हिंदुस्तानी एकेडमी, प्रयागराज, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में नया परिमल द्वारा आज एकदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी कंप्यूटर की कृत्रिम मेधा और भाषा विषय पर आयोजित किया गया है। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र का संचालन करते हुए डॉ विनम्र सेन सिंह तथा विद्वतजनों का स्वागत करते हुए डॉ विजय कुमार रबिदास कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। बीज वक्तव्य देते हुए प्रो. अमरेंद्र त्रिपाठी बताते है, जैसा कि कहा जा रहा है कि एआई मानव जाति की मेधा को अतिक्रमित कर देगी लेकिन नवीन नवाचारों को लेकर प्राय: आशंकाएं उत्पन्न होती रही है और कुछ हद तक निरर्थक भी होती रही है। संभव है कि एआई के संबंध में भी ऐसा ही हो, क्योंकि कोई भी नवाचार मनुष्यता का सहयोगी होगा लेकिन विकल्प कभी नहीं हो सकता।
प्रोफेसर सतीश सिंह ने एआई में संवेदनात्मक अनुभूतियों की संभावना को लेकर अवगत कराया कि यह तभी हो सकता है जब एआई में सूचना हमारे परिवेश के अनुरूप रहेंगी तब वह भाषा, व्यवहार और अनुभूति के अनुरूप कार्य करेगा।
वक्तव्य के दौरान प्रोफेसर अमिताभ सत्यम, प्रोफेसर योगेंद्र प्रताप सिंह और प्रोफेसर रामचंद्र ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए प्रो महावीर शरण जैन ने कहा कि भारतीय भाषा को भविष्य में पहुंचने के लिए एआई को निरंतर कई मुद्दों प्रयास करना आवश्यक है, जिसमें और अधिक खुले डाटा का संकलन कम संसाधन बोलियां पर विशेष ध्यान मॉडल प्रशिक्षण में सांस्कृतिक एवं भाषिक विविधता को कम करना तथा व्यापक समुदाय द्वारा तकनीकी उपकरणों को शामिल करना है।
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