मेरठ 4 दिसंबर (आरएनएस )। फर्जी स्टांप पर किए गए 997 बैनामे व सरकार को 7.50 करोड़ राजस्व का नुकसान पहुंचाने के मास्टरमाइंड अधिवक्ता विशाल वर्मा के साथी स्टांप वेंडर अक्षय गुप्ता ने छह मुकदमों की जमानत में भी फर्जीवाड़ा कर दिया। लालकुर्ती और टीपीनगर थाने से जमानत के कागजात फर्जी तरीके से तस्दीक करा दिए, जिन दारोगा से कागजात तस्दीक होना दिखाया, वह उक्त थानों में तैनात ही नहीं है।
मामला उजागर होने पर अदालत ने अक्षय की जमानत निरस्त कर दी और सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराया। अक्षय हाईकोर्ट चले गए, वहां से आदेश कराया कि छह मुकदमों में सिर्फ दो ही जमानती होने चाहिए। उसके बाद दो जमानती लगाकर जमानत ले ली। पुलिस ने अक्षय गुप्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह और सीओ अभिषेक तिवारी ने बताया कि स्टांप घोटाले के आरोपित अक्षय गुप्ता पुत्र मित्रसैन गुप्ता निवासी सूरजकुंड थाना सिविल के खिलाफ दारोगा अंकित कुमार ने मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि अक्षय गुप्ता ने धोखाधड़ी के छह मुकदमों में जमानती दीपक पुत्र मुरारी, सोनू पुत्र मुरारी निवासी मुल्ताननगर टीपीनगर अजय पुत्र मुरारीलाल, रोशन पुत्र किशनलाल, पंकज पुत्र राकेश, भारत पुत्र राजेंद्र कुमार निवासीगण कसेरुखेडा थाना लालकुर्ती को जमानतदार बनाया। जमानत कराने के लिए अधिवक्ता नवी हसन जैदी को चुना गया।
उक्त लोगों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर टीपीनगर थाने के दारोगा चंद्रपाल और लालकुर्ती थाने के दारोगा हरपाल और रंजीत से तस्दीक दिखाए गए। जांच में सामने आया कि उक्त दारोगा इन थानों में तैनात नहीं है। अक्षय गुप्ता ने उनकी फर्जी मोहर बनाकर हस्ताक्षर कर दिए। सिविल लाइन पुलिस ने आरोपित अक्षय गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया। उसने पूछताछ में बताया कि जमानत की फर्जी पटकथा नवी हसन जैदी के साथ मिलकर बनाई थी। पुलिस ने अक्षय गुप्ता को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया।
उपनिबंधन कार्यालय के कनिष्ठ सहायक निबंधक प्रदीप कुमार ने सिविल लाइंस थाने में बैनामा कराने वालों के खिलाफ 22 मई 2024 को मुकदमा कराया। साथ ही 997 लोगों को स्टांप में कमी बताकर नोटिस जारी किए गए। सभी ने बताया कि उन्होंने अधिवक्ता विशाल वर्मा को स्टांप के पूरे पैसे दिए थे।
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