लखनऊ 4 दिसंबर (आरएनएस ) स्थित बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में 4 दिसंबर को ‘नवाचार डिजाइन और उद्यमिताÓ विषय पर आधारित द्विदिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। यह राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला 55 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों, ष्ठढ्ढश्वञ्ज प्रतिनिधियों और स्ष्टश्वक्रञ्ज सदस्यों के लिए विशेष रूप से आयोजित की गई है, जिसका उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, उद्यमिता और डिजाइन थिंकिंग को बढ़ावा देना है। यह आयोजन बीबीएयू, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, शिक्षा मंत्रालय के नवाचार प्रकोष्ठ, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, पीएम श्री स्कूल, स्कूल इनोवेशन काउंसिल और वाधवानी फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हो रहा है।कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में एडीशनल स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर विष्णु कांत पांडेय मौजूद रहे। मंच पर रिजनल ऑफिसर, इनोवेशन सेल, शिक्षा मंत्रालय शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, इनोवेशन एवं डिजाइन थिंकिंग विशेषज्ञ अम्बुमति, नोडल सेंटर हेड प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा और को-ऑर्डिनेटर डॉ. अर्पित शैलेश भी उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और बाबासाहेब के छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। विश्वविद्यालय के कुलगीत के पश्चात अतिथियों का स्वागत पौधा भेंट कर किया गया। सत्र का औपचारिक संचालन डॉ. नरेंद्र सिंह ने किया।सर्वप्रथम नोडल सेंटर हेड प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम शिक्षा क्षेत्र में नई सोच, नए प्रयोगों और व्यावहारिक नवाचारों को बढ़ावा देने का एक उत्कृष्ट मंच है, जहां देशभर के शिक्षा अधिकारी एक साथ जुटकर अनुभव साझा करेंगे और नई रणनीतियों पर विचार करेंगे।कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में नवाचार, डिजाइन और उद्यमिता महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान का साधन नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की आधारशिला है। भारत आज सबसे बड़ी युवा आबादी वाला देश है, और यदि यह युवा शक्ति अपनी प्रतिभा का उपयोग सही दिशा में करे तो विकास की असीम संभावनाएँ साकार हो सकती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश को पुन: वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में स्थापित करने के लिए प्रतिवर्ष बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने होंगे। यह लक्ष्य तभी संभव है जब युवा नौकरी पाने के बजाय नौकरी देने वाला बनने की मानसिकता अपनाएँ। उन्होंने युवाओं से असफलता के भय से मुक्त होकर नवाचार और उद्यमिता के मार्ग पर आगे बढऩे का आह्वान किया।मुख्य अतिथि विष्णु कांत पांडेय ने पीएम श्री स्कूल योजना की महत्ता पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि यह योजना विद्यालयी शिक्षा को नई दिशा देने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विद्यालय स्तर पर ही नवाचार और उद्यमिता के बीज बोना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से सरकार ने अटल इनोवेशन मिशन के तहत अटल टिंकरिंग लैब स्थापित की हैं, जहां बच्चों को तकनीकी प्रयोगों, नवाचार और समस्या-समाधान पर कार्य करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि जब कोई बच्चा अपने नए विचारों को वास्तविक रूप देता है, तो न केवल उसका स्वयं का व्यक्तित्व विकसित होता है बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा भी मजबूत होती है।कार्यशाला के दौरान नवाचार एवं उद्यमिता की विद्यालयों में भूमिका, मानव-केंद्रित डिजाइन थिंकिंग, समस्या-समाधान आधारित परियोजनाओं, केस स्टडी और समूह गतिविधियों पर आधारित कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। प्रतिभागियों ने विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन सेंटर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का भी भ्रमण किया, जहाँ उन्हें स्टार्टअप संस्कृति, नवाचार प्रक्रियाओं और तकनीकी समाधानों के विकास का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ। इससे प्रतिभागियों में उद्यमशीलता और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र की गहरी समझ विकसित हुई।कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। डॉ. अर्पित शैलेश ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में शिक्षक, शिक्षा अधिकारी, ष्ठढ्ढश्वञ्ज और स्ष्टश्वक्रञ्ज से जुड़े सदस्य तथा विद्यार्थी शामिल रहे।
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