दुर्ग, 4 दिसम्बर (आरएनएस)। दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड में स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय गोडपेंड्री की पोस्टेड एलबी टीचर शारदा क्षत्रिय को स्कूल में लगातार अव्यवस्था फैलाने, समय पर न आने, स्टाफ के साथ विवाद करने, छात्रों को भड़काने और ग्रामीणों के साथ अनुचित व्यवहार करने के आरोपों में सस्पेंड कर दिया गया है। यह आदेश दुर्ग शिक्षा संभाग के संभागीय संयुक्त संचालक (शिक्षा) ने जारी किया है। घटना की पृष्ठभूमि में ग्राम पंचायत गोडपेंड्री के सरपंच, शाला प्रबंधन समिति और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों द्वारा शिक्षिका के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि शारदा क्षत्रिय समय पर क्लास में नहीं आती थीं और पढ़ाई-लिखाई में लापरवाही बरतती थीं। इसके अलावा वह सहकर्मी शिक्षकों से विवाद करती थीं, जिससे स्कूल का माहौल तनावपूर्ण हो गया था। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि शिक्षिका छात्रों को अन्य शिक्षकों के खिलाफ भड़काती थीं, जिससे बच्चों में भ्रम और अनुशासनहीनता बढ़ रही थी। ग्रामीण और जनप्रतिनिधियों में भी टीचर के व्यवहार को लेकर असंतोष और नाराजगी बढ़ गई थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी, दुर्ग ने तुरंत जांच के आदेश दिए। जांच अधिकारी ने पूरी जांच कर अपनी रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंप दी। जांच में पाया गया कि टीचर पर लगे सभी आरोप सही हैं और उनके कारण स्कूल में अनुशासनहीनता फैल रही थी, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। शिक्षिका को शिकायत के बाद कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन उनके उत्तर से जांच कमेटी संतुष्ट नहीं थी। इसके बाद उन्हें लापरवाही बरतने और अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाने के मामले में दोषी पाया गया। विभाग ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के तहत और गंभीर कदाचार के आरोप में शारदा क्षत्रिय को सस्पेंड कर दिया। इस मामले में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को भी शिक्षिका के व्यवहार के बारे में शिकायत भेजी गई थी। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने सस्पेंशन का प्रस्ताव भेजा, जिसे संभागीय संयुक्त संचालक (शिक्षा) ने मंजूरी देते हुए आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि में शिक्षिका का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, दुर्ग का कार्यालय रहेगा। इस कार्रवाई से स्पष्ट संदेश जाता है कि स्कूल में अनुशासन बनाए रखना और छात्रों की पढ़ाई पर ध्यान देना प्राथमिकता है। शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में किसी भी शिक्षिका या शिक्षक की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिक्षक निलंबन के दौरान विद्यालय की व्यवस्थाओं और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए स्कूल प्रबंधन समिति और अन्य शिक्षक जिम्मेदार रहेंगे। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों में अनुशासन बनाए रखने और नियमित पढ़ाई-लिखाई सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
त्रिपाठी
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