लखनऊ 5 दिसंबर (आरएनएस ) समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में गंभीर खामियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल की ओर से यह मांग उठाई गई कि लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची के प्रारूप में कॉलम 8 में शिक्षण संस्थानों के नाम तत्काल अंकित कराए जाएं।सपा ने कहा है कि यह सुधार 16 दिसंबर 2025 से पहले होना आवश्यक है, ताकि अवैध मतदाताओं की जांच कर नियमानुसार आपत्तियां दाखिल की जा सकें।ज्ञापन में बताया गया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 2 दिसंबर 2025 को शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची प्रकाशित की जानी थी। आयोग द्वारा निर्धारित प्रारूप में कॉलम 8 में उस शिक्षण संस्थान का नाम दर्ज होना अनिवार्य है, जहाँ शिक्षक पिछले 6 वर्षों में कम से कम 3 वर्ष से कार्यरत हो। लेकिन जारी सूची में इस कॉलम को खाली छोड़ दिया गया है।सपा के अनुसार इससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि कौन शिक्षक किस संस्था में कार्यरत है, कौन पात्र है, कौन गैर-शिक्षक होते हुए भी सूची में शामिल हो गया है, और किस संस्थान से कितने मतदाता बनाए गए हैं। ऐसे में कॉलम 8 को खाली रखना पारदर्शिता और निष्पक्षता—दोनों के लिए बाधक है। पार्टी ने मांग की है कि इस कॉलम में शिक्षण संस्थानों के नाम अनिवार्य रूप से जोड़े जाएं, जिससे अवैध नामों पर आपत्ति की प्रक्रिया सुचारू रूप से की जा सके।ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि भारत निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन दिनांक 5 सितंबर 2016 के अनुसार अनऐडेड प्राइवेट विद्यालयों के शिक्षकों का नाम भी शिक्षक मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए। गाइडलाइन के पेज 19 के पैरा 2-3-4(2) और पैरा 2-3-5 में इसका स्पष्ट उल्लेख है।इसके बावजूद विभिन्न जनपदों में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी केवल ऐडेड मदरसों के शिक्षकों के नाम ही सूची में जोड़ रहे हैं, जबकि अनऐडेड मदरसों को सूची से बाहर रखा जा रहा है। सपा ने बताया कि डीएमओ यह तर्क दे रहे हैं कि उनके पास अनऐडेड संस्थानों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जबकि आयोग के निर्देशानुसार प्रधानाचार्य का प्रमाणपत्र ही पर्याप्त साक्ष्य माना गया है।सपा ने कहा कि इस प्रकार की लापरवाही न केवल आयोग के निर्देशों का उल्लंघन है, बल्कि माननीय हाईकोर्ट के 5 मार्च 2008 के आदेश का भी अनुपालन नहीं किया जा रहा है। इसलिए सभी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में सभी जिलों के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि अनऐडेड मदरसों के शिक्षकों के नाम भी नियमानुसार शिक्षक मतदाता सूची में सम्मिलित किए जाएं, जिससे चुनाव स्वतंत्र, पारदर्शी और निष्पक्ष रूप से संपन्न हो सकें।ज्ञापन नेता विरोधी दल विधान परिषद लाल बिहारी यादव, के.के. श्रीवास्तव, हरिश्चंद्र सिंह और राधेश्याम सिंह सहित अन्य प्रतिनिधियों ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपा।
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