कोलकाता 5 दिसंबर (आरएनएस)। 32,000 नौकरियों के मामले में आज प्राइमरी एजुकेशन बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है। एकतरफा सुनवाई रोकने के लिए यह कैविएट फाइल की गई थी। कैविएट के तहत मांग की गई है कि, अगर उक्त मामला फिर सुप्रीम कोर्ट में आता है तो एक तरफ सुनवाई नहीं हो। कलकत्ता हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 32,000 प्राइमरी टीचरों की नौकरी बहाल रखी है। उक्त मुद्दे पर केस करने वालों के वकीलों के एक ग्रुप ने कहा था कि वे हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। इसलिए, ‘चिंतितÓ प्राइमरी एजुकेशन बोर्ड ने पहले ही कैविएट फाइल कर दी है। अर्थात अब मामले की सुनवाई के लिए दोनों पक्षों की जानकारी जरुरी होगी। बता दे कि, तत्कालीन हाई कोर्ट के जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय ने भ्रष्टाचार के आरोप में प्राथमिक शिक्षक मामले में 32,000 नौकरियां रद्द करने का ऑर्डर दिया था। पिछले बुधवार को जस्टिस तपोब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस रीताब्रत कुमार मित्रा की डिवीजन बेंच ने जस्टिस अभिजीत गंगोपाध्याय के उस ऑर्डर को खारिज कर दिया था। कहा गया था कि अगर भ्रष्टाचार हुआ भी था, तो इतने सारे शिक्षकों की नौकरियां रद्द नहीं की जा सकतीं। कारण वह लोग पिछले नौ साल से काम कर रहे थे। कोर्ट ने उनके परिवारों का ध्यान रखते हुए मानवीय आधार पर उनकी नौकरियां बरकरार रखी हैं। अभी तक इस ऑर्डर को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कोई केस फाइल नहीं किया गया है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, ‘वंचितÓ नौकरी चाहने वालों का एक ग्रुप अगले हफ्ते टॉप कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।
अगर सुप्रीम कोर्ट में कोई केस फाइल किया जाता है, तो उस पर एकतरफा सुनवाई जाती होती है। बोर्ड यह पक्का करना चाहता है कि पहले केस के मामले में ऐसा न हो। इसलिए, कारण पहले से कैविएट फाइल की गई है। बोर्ड ने कहा है कि अगर इस बारे में कोई केस फाइल किया जाता है, तो उनकी बात भी सुनी जाए। इस मामले में, अगर कोई केस फाइल किया जाता है, तो बोर्ड को भी नोटिस दिया जाएगा। इस वजह से, उन्हें अपनी बात कहने का मौका मिलेगा। पहले केस में 141 पेज के फैसले में, हाई कोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में कोई बड़े पैमाने पर गड़बड़ी नहीं हुई थी। कुछ नाकाम नौकरी ढूंढने वालों को अपनी नाराजग़ी के कारण 32,000 टीचरों का भविष्य बर्बाद करने का मौका नहीं मिल सकता। अगर इस तरह से नौकरियां कैंसिल की गईं, तो कई बेगुनाह, ईमानदार टीचरों को बेवजह बेइज्जती, शर्म और बेइज्जती झेलनी पड़ेगी। इसके अलावा, भ्रष्टाचार की जांच अभी भी चल रही है। नौकरियां कैंसिल न करने का यह भी एक कारण है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन लोगों को नौकरियां मिलीं, वे पर्सनली भ्रष्टाचार में शामिल नहीं थे। ऐसा कोई सबूत नहीं मिला।
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