*निर्माण के साथ ही उखडऩे लगी सतह, गड्ढा मुक्त अभियान सवालों के घेरे में*
बल्दीराय/सुल्तानपुर,06 दिसंबर (आरएनएस)। प्रदेश सरकार द्वारा संपर्क मार्गों को गड्ढामुक्त करने के लिए चलाई जा रही योजना, विभागीय लापरवाही, घटिया निर्माण सामग्री तथा ठेकेदारों की मनमानी के कारण ग्रामीणों की उम्मीदों पर पानी फेर रही है। जमीन पर हाल यह है कि कई मार्गों पर बनाए गये डामर की सड़कों की सतह निर्माण के कुछ ही दिनों बाद उखड़कर फिर पुराने गड्ढों जैसी स्थिति में लौट आती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मानक के विरुद्ध घटिया मैटेरियल, पतली परत व कमजोर बेस लेयर डालकर “काम पूरा” दिखा दिया जाता है, जिससे सड़क का जीवन महीनों से अधिक चलता ही नहीं।
बताते चलें कि चंदौर से सत्यसाईं आश्रम, हरौरा बाजार से चतुरी का पुरवा, तथा पीरोसरैया से नहर पटरी होते हुए पडऱे तक विभाग द्वारा गड्ढामुक्त घोषित किए गए मार्ग अब पुन: गड्ढों में तब्दील होनेके बाद बन रहा है किंतु मानक घटिया है । वहीं पीरोसरैया से ब्रह्मौली तक सड़क की स्थिति बेहद खतरनाक है, जिस पर आवागमन किसी बड़े हादसे की आशंका से खाली नहीं। उधर राधे पंडित से ग्राम्यांचल इंटर कॉलेज होते हुए शारदा नहर मार्ग पर उखड़ी सड़क को ठीक करने का कार्य तो शुरू किया गया पर मानक स्टोन बेस की जगह मात्र बोल्डर गिरा दिए गए, जिससे रास्ता और दुर्गम व खतरनाक हो गया। सड़क निर्माण में डामर की गुणवत्ता, उसके ग्रेड, स्टोन बेस, साइड मिट्टी कम्पैक्शन और मोटाई से जुड़े मानक स्पष्ट हैं, किंतु स्थानीय स्तर पर बिना टेक्निकल सुपरविजन के सिर्फ औपचारिक परत डालकर कार्य पूरा मान लिया जाता है। आरोप हैं कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से कमीशन के खेल में गुणवत्ताविहीन निर्माण को ‘ऑल इज वेलÓ का प्रमाणन दे दिया जाता है। यही कारण है कि सरकार की करोड़ों की योजना ठेकेदारों की कमाई का जरिया बनती जा रही है और जनता को टिकाऊ सड़क के स्थान पर सिर्फ कुछ महीनों की अस्थायी राहत मिल पाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री की गड्ढा मुक्त योजना की मंशा अच्छी होने के बावजूद विभागीय भ्रष्टाचार ने इसे मजाक बनाकर रख दिया है। ग्रामीणों ने शासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की तकनीकी जांच, गुणवत्ता परीक्षण तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए, ताकि सरकार की साख और जनता की सुरक्षा दोनों कायम रह सकें।
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