उत्तरकाशी,07 दिसंबर (आरएनएस)। पर्यावरण सरंक्षण को लेकर पर्यावरणविद् अध्ययन यात्रा के तहत हर्षिल घाटी पहुंचे विभिन्न पर्यावरणविदों का आपदा प्रभावित क्षेत्र धराली एवं हर्षिल के लोगों ने विरोध जताया है। आपदाग्रस्त धराली के ग्रामीणों ने रविवार को कलक्ट्रेट में पर्यावरणविदों के विरुद्ध नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि पर्यावरणविदों के विरोध के चलते गंगोत्री हाईवे का उत्तरकाशी से भैरोंघाटी तक चौड़ीकरण कार्य लटका हुआ है। जबकि चीन सीमा से लगे जनपद में हाईवे का चौड़ीकरण किया जाना बेहद जरूरी है। बता दें कि गंगोत्री हाईवे चौड़ीकरण की जद में भैरोंघाटी से झाला तक करीब 6 हजार देवदार के पेड़ कटान की जद में आ रहे हैं, इसे लेकर पर्यावरण हितों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन व पर्यावरणविद् अध्ययन यात्रा भी निकाल रहे हैं। इसकी भनक लगने पर रविवार को आपदाग्रस्त धराली के ग्रामीण कलक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने पर्यावरणविदों का कड़े शब्दों में विरोध किया। क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधि धराली सुशील पंवार ने कहा कि चारधाम आलवेदर रोड परियोजना में गंगोत्री हाईवे का चौड़ीकरण होना बेहद आवश्यक है, एक ओर भारत का पड़ोसी व चिर प्रतिद्वंदी देश चीन भारत-चीन सीमा तक सड़क निर्माण कर रहा है। वहीं, सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के बाद भी उत्तरकाशी जनपद में पेड़ों के कटाव की जद में आने को मुद्दा बनाकर हाईवे चौड़ीकरण का काम लटकाया जा रहा है। सचेंद्र सिंह पंवार ने कहा कि दिल्ली में बैठकर कुछ पर्यावरणविद् पहाड़ों का भविष्य तय कर रहे हैं। कहा कि यह प्रचारित किया जा रहा है कि भैरोंघाटी से झाला तक 7 हजार पेड़ कटाव की जद में आ रहे हैं, जो कि गलत है। वन विभाग व बीआरओ के द्वारा किए गए सर्वे में 3500 पेड़ आ रहे हैं। इसमें स्थानीय काश्तकारों के 20 प्रतिशत सेब व अखरोट के शामिल हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन से पर्यावरणविदों पर पाबंदी लगाये जाने की मांग की। प्रदर्शन करने वालों में संजय पंवार, ग्राम प्रधान अजय नेगी, भूपेंद्र पंवार, उमेश पंवार, जय भगवान आदि रहे।
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