नईदिल्ली,14 अपै्रल (आरएनएस)। केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल से 18 अप्रैल तक संसद का जो विशेष सत्र बुलाया है, उसमें लोकसभा के विस्तार का प्रस्ताव रखा जाएगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने जा रही है और इसका मसौदा विधेयक सभी सांसदों को भेज दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, 850 सीटों में से 815 सीटें राज्यों को आवंटित होंगी और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आरक्षित होंगी।
लोकसभा में सीटों को बढ़ाने का यह कदम नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक) के कार्यान्वयन में तेजी लाने की योजना का हिस्सा है। इस विधेयक के पारित होने से लोकसभा में लगभग एक तिहाई सीटें, यानी 273 सीटें, महिला सांसदों के लिए आरक्षित की जाएंगी। केंद्र सरकार ने संविधान में संशोधन के संभावित प्रस्ताव से पहले सांसदों के साथ विधेयक का मसौदा साझा किया है। ये बदलाव 2029 के आम चुनावों से प्रभावी हो सकते हैं।
केंद्र सरकार लोकसभा विस्तार को आकार देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 82 में बदलाव करके अनिवार्य निर्वाचन क्षेत्र की पुनर्सीमा की प्रक्रिया से हटा देगी।वर्तमान में अनुच्छेद 82 के तीसरे प्रावधान में साफ लिखा है कि 2026 की जनगणना के बाद अगली पुनर्सीमा होगी, लेकिन विधेयक में यह प्रावधान को हटा दिया जाएगा। अभी तक दक्षिण राज्य 2026 की जनगणना के हिसाब से सीटों के बंटवारे पर चिंतित थे।
केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण को जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन की आवश्यकता से अलग करने का प्रस्ताव रखा है। दरअसल, महिला आरक्षण विधेयक 2023 को अगली जनगणना के बाद ही लागू होना था, ऐसे में इस कानून पर अमर 2034 तक नहीं हो पाता, जबकि सरकार इसे 2029 तक लाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में केंद्र हाल में होने वाली जनगणना की जगह 2011 की जनगणना का उपयोग करेगी, ताकि ये 2029 तक लागू हो।
विशेष सत्र में लोकसभा सीटों का विस्तार किया जाएगा, जिसमें महिलाओं के लिए 273 सीटें आरक्षित होंगी। इससे अनुसूचित जाति की सीटें 84 से 126/136 और अनुसूचित जनजाति की सीटें 47 से बढ़कर 70 हो जाएंगी। इसके अलावा, सरकार परिसीमन विधेयक, 2026 पेश करेगी, जिसके तहत 2011 जनगणना के आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण होगा। इसके लिए 2 प्रमुख संवैधानिक संशोधनों की आवश्यकता है और संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत होना जरूरी है।
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