चंडीगढ़ 08 Dec, (Rns): आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया इंचार्ज अनुराग ढांडा ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि हरियाणा के किसान आज इतिहास की सबसे बड़ी आपदा और सत्ता की सबसे बड़ी लापरवाही के बीच पिस रहे हैं। आज बीजेपी की ‘नायब विपदा’ के कारण बदहाली और अफसरशाही की मार झेल रहा है। 2025 की बाढ़ में 5.37 लाख किसानों की 31 लाख एकड़ फसल तबाह हो गई, लेकिन मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार ने न राहत दी, न मुआवजा दिया, न जमीनी जांच की। सिर्फ पोर्टल की नौटंकी करके जिम्मेदारी से भाग खड़े हुए।
बीजेपी सरकार ने 30 नवंबर तक मुआवजा देने का वादा किया था। दिसंबर आ गया, लेकिन किसानों के खाते में एक फूटी कौड़ी तक नहीं पहुँची। 8 जिलों में गिरदावरी अधूरी पड़ी है और सबसे प्रभावित फतेहाबाद में ₹50- 60 करोड़ की फाइलें अटकी हुई हैं। यह किसानों के साथ विश्वासघात नहीं तो और क्या है?
इसके उलट, पंजाब की AAP सरकार ने सिर्फ 30 दिनों में ₹20,000 प्रति एकड़ मुआवजा सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर कर दिया। 2,508 गांवों और 3.5 लाख एकड़ को कवर करते हुए। नीयत साफ हो तो राहत भी समय पर पहुंचती है। हरियाणा की बीजेपी सरकार में इसी नीयत की कमी दिखाई देती है, और किसान इसकी कीमत चुका रहा है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ₹15,000 प्रति एकड़ जैसे ‘मजाक’ भरे मुआवजे की घोषणा कर किसानों के जख्मों को और गहरा किया है। जबकि नुक्सान इससे कहीं ज्यादा हुआ है। लेकिन मुख्यमंत्री साहब को किसानों से ज्यादा टेस्ला की सवारी में दिलचस्पी है। यह संवेदनहीनता चिंताजनक है।
अनुराग ढांडा ने कहा कि हरियाणा का किसान अब भी सरकारी दफ्तरों की सीढ़ियां घिस-घिसकर थक चुका है। MSP पर धोखा अलग, और खाद की कालाबाजारी से किसान की कमर टूट चुकी है। ₹1,350 का खाद का कट्टा ₹2,000 में बिक रहा है, मगर सरकार आंखें बंद किए बैठी है। प्रदेश का किसान आज सरकार से पूछ रहा है। क्या पोर्टल खोलना ही राहत देना है? क्या किसानों के खून-पसीने की कीमत सिर्फ घोषणाओं में ही तय होगी? क्या बाढ़ राहत का पैसा कभी किसानों के खातों में पहुँचेगा या फाइलों में ही कैद रहेगा?
अनुराग ढांडा ने कहा कि हरियाणा में किसानों की यह दुर्दशा सरकार की नीयत, नीति और नेतृत्व, तीनों की विफलता का परिणाम है। अगर मुख्यमंत्री को समझ नहीं आ रहा कि संकट के समय किसान को कैसे संभाला जाता है, तो पंजाब की AAP सरकार से सीख लेना ही बेहतर है।

