नई दिल्ली 10 Dec, (Rns): कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के लिए उनका 79वां जन्मदिन कानूनी उलझनों के साथ आया है। जिस दिन वह अपना जन्मदिन मना रही थीं, उसी दिन दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें एक पुराने मामले में नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामला उनके भारतीय नागरिक बनने से पहले ही वोटर लिस्ट में नाम दर्ज करवाने के गंभीर आरोपों से जुड़ा है। कोर्ट ने सोनिया गांधी के साथ-साथ दिल्ली पुलिस को भी नोटिस जारी किया है और मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 के लिए तय की है।
दरअसल, यह पूरा मामला एक क्रिमिनल रिवीजन याचिका से जुड़ा है जिसे विकास त्रिपाठी नामक व्यक्ति ने दायर किया है। याचिकाकर्ता ने निचली अदालत (मजिस्ट्रेट कोर्ट) के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने से इनकार कर दिया गया था। स्पेशल जज विशाल गोगने ने याचिकाकर्ता के वकील पवन नारंग की शुरुआती दलीलों को सुनने के बाद यह नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि सोनिया गांधी को भारत की नागरिकता अप्रैल 1983 में मिली थी, लेकिन उनका नाम इससे तीन साल पहले यानी 1980 में ही नई दिल्ली संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया था।
याचिकाकर्ता के दावों के मुताबिक, सोनिया गांधी का नाम 1980 में वोटर लिस्ट में जोड़ा गया, फिर 1982 में हटाया गया और 1983 में दोबारा शामिल किया गया। वरिष्ठ वकील पवन नारंग ने कोर्ट में दलील दी कि जब सोनिया गांधी भारत की नागरिक ही नहीं थीं, तो उनका नाम मतदाता सूची में कैसे आया? इसका सीधा मतलब है कि इसके लिए कुछ दस्तावेज जाली, मनगढ़ंत और झूठे तरीके से तैयार किए गए होंगे। वकील ने कोर्ट से कहा कि वे अभी चार्जशीट की मांग नहीं कर रहे, बल्कि चाहते हैं कि पुलिस कम से कम इस पहलू की जांच करे कि आखिर बिना नागरिकता के नाम लिस्ट में कैसे चढ़ा। उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस तथ्यों पर एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया था, जिसके बाद उन्हें कोर्ट आना पड़ा।
गौरतलब है कि इससे पहले 11 सितंबर को एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने इस याचिका को खारिज कर दिया था। तब जज ने कहा था कि नागरिकता का मुद्दा पूरी तरह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है और वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने का काम चुनाव आयोग का है। अदालत ने उस वक्त यह तर्क दिया था कि इस मामले में जांच का आदेश देना संवैधानिक संस्थाओं के काम में बेवजह दखलअंदाजी होगी और यह संविधान के अनुच्छेद 329 का उल्लंघन होगा। अब इसी फैसले के खिलाफ दायर रिवीजन याचिका पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए सोनिया गांधी और पुलिस से जवाब मांगा है।

