चंडीगढ़ ,10 दिसंबर (आरएनएस)। सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने राज्य को बाल भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने के लिए प्रयास तेज़ कर दिए हैं। इसी कड़ी में, फरीदकोट में भीख मांग रहे 2 बच्चों को बचाया गया है। डॉ. बलजीत कौर ने बताया कि उन्होंने फरीदकोट फाटक के पास इन बच्चों को देखा और तुरंत जि़ला बाल संरक्षण टीम को सूचित किया। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दोनों बच्चों को बचाकर जि़ला बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया। जाँच के बाद, उन्हें बाल गृह में अस्थायी सुरक्षित आश्रय प्रदान किया गया है। डॉ. बलजीत कौर ने राज्य की सभी जि़ला बाल संरक्षण टीमों की सराहना की, जिनके बाल संरक्षण और जीवनजोत परियोजना के तहत तत्काल और समर्पित प्रयासों के राज्य भर में सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये टीमें सरकार की नीतियों को ज़मीनी स्तर पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कैबिनेट मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने कहा कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान का सपना है कि पंजाब में कोई भी बच्चा सडक़ों पर भीख मांगता न दिखे। सरकार जीवनजोत परियोजना के माध्यम से भीख मांगने वाले बच्चों को शिक्षा से जोडऩे के लिए प्रतिबद्ध है और इस अभियान के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। बच्चों से भीख मंगवाा न केवल एक सामाजिक बुराई है, बल्कि यह बच्चों के अधिकारों का भी उल्लंघन है। डॉ. बलजीत कौर ने माता-पिता और बच्चों से भीख मंगवाने वाले गिरोहों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डॉ. बलजीत कौर ने राज्य के नागरिकों से अपील की कि अगर वे कहीं भी किसी बच्चे को भीख मांगते हुए देखें, तो भीख देने की बजाय चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर सूचित करें और इस सामाजिक बुराई को खत्म करने में राज्य सरकार का सहयोग करें।
क्या है जीवनज्योत अभियान
जीवनज्योत अभियान:?राज्य के विभिन्न जिलों में बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं, जहां भीख मांगते पाए गए बच्चों की पहचान कर उन्हें बचाया जा रहा है।
डीएनए परीक्षण:?संगठित गिरोहों को खत्म करने के लिए बचाए गए बच्चों और उनके साथ रह रहे वयस्कों के बीच संबंध की पुष्टि के लिए डीएनए परीक्षण कराए जा रहे हैं। यदि डीएनए रिपोर्ट मेल नहीं खाती, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती है।
कानूनी सुधार:?भिक्षावृत्ति रोकथाम अधिनियम 1971 में संशोधन करके बच्चों को भीख मांगने के लिए मजबूर करने वाले रैकेट चलाने वालों, अभिभावकों या माता-पिता के खिलाफ कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया जाएगा।
पुनर्वास:?बचाए गए बच्चों को उनकी पात्रता और दस्तावेज़ों के आधार पर विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के तहत पुनर्वासित किया जा रहा है। इनमें से कई बच्चों को फिर से स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी दाखिला दिलाया गया है।
नागरिकों से अपील: सरकार ने जनता से किसी भी बच्चे को भीख न देने और किसी भी ऐसे बच्चे को देखे जाने पर तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर रिपोर्ट करने की अपील की है।
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