नई दिल्ली ,13 दिसंबर । डिजिटल सुरक्षा की दिशा में भारत सरकार की पहल अब रंग लाती दिखाई दे रही है। बीते कुछ समय से सुर्खियों में रहे ‘संचार साथीÓ प्लेटफॉर्म को लेकर दूरसंचार विभाग (ष्ठशञ्ज) ने ताजा आंकड़े जारी किए हैं, जो बताते हैं कि यह तकनीक आम लोगों के लिए कितनी कारगर साबित हो रही है। विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस पोर्टल की मदद से हर मिनट औसतन 6 संदिग्ध मोबाइल फोन्स को ब्लॉक किया जा रहा है। कार्रवाई की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह सिस्टम हर मिनट 4 मोबाइल फोन को ट्रेस कर रहा है। इतना ही नहीं, खोए हुए फोन्स की बरामदगी के मामले में भी बड़ी सफलता मिली है, जहां हर 2 मिनट में 3 खोए हुए मोबाइल रिकवर किए जा रहे हैं।
संचार साथी प्लेटफॉर्म की उपयोगिता केवल फोन ब्लॉक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साइबर फ्रॉड और फर्जी कॉल्स पर लगाम लगाने में एक बड़ा हथियार बन गया है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए यूजर्स अपने फोन पर आने वाले किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या वॉट्सऐप कम्युनिकेशन की शिकायत सीधे दर्ज करा सकते हैं। शिकायत मिलने पर विभाग इसकी जांच करता है और फ्रॉड की पुष्टि होने पर न केवल उस नंबर को बंद किया जाता है, बल्कि उस हैंडसेट (ढ्ढरूश्वढ्ढ) को भी ब्लॉक कर दिया जाता है, ताकि उसका दोबारा इस्तेमाल न हो सके।
इसके अलावा, यह पोर्टल खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन को खोजने में पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए मददगार साबित हो रहा है। अगर किसी यूजर का फोन खो जाता है, तो वह इस पोर्टल पर अपनी डिटेल्स और पुलिस शिकायत के आधार पर फोन का ढ्ढरूश्वढ्ढ नंबर ब्लॉक करवा सकता है। इससे फोन बेकार हो जाता है और जैसे ही कोई उसमें नई सिम डालता है, उसकी लोकेशन ट्रेस हो जाती है। सुरक्षा के लिहाज से इस प्लेटफॉर्म पर एक और अहम सुविधा दी गई है, जिसके जरिए कोई भी व्यक्ति यह पता लगा सकता है कि उसके नाम पर कुल कितने सिम कार्ड एक्टिव हैं। अगर लिस्ट में कोई ऐसा नंबर दिखता है जो यूजर का नहीं है, तो उसे तुरंत रिपोर्ट करके बंद करवाया जा सकता है। साथ ही, पुराने या सेकंड हैंड फोन खरीदते समय लोग इस पोर्टल के जरिए ढ्ढरूश्वढ्ढ नंबर डालकर यह भी चेक कर सकते हैं कि फोन असली है या नकली, या फिर कहीं वह चोरी का तो नहीं है।
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