तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में नागार्जुनकोंडा में राष्ट्रीय अकादमी की घोषणा, उपेक्षित बौद्ध स्थलों के संरक्षण और ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने पर वैश्विक सहमति
नई दिल्ली, 16 दिसंबर (आरएनएस)। भारत ने अपनी विशाल ग्रामीण बौद्ध विरासत के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। ई दिल्ली में आयोजित ग्रामीण बौद्ध विरासत संरक्षण पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन अवसर पर दिल्ली घोषणा को औपचारिक रूप से अपनाया गया, साथ ही आंध्र प्रदेश के नागार्जुनकोंडा में ग्रामीण बौद्ध विरासत संरक्षण एवं विकास के लिए एक राष्ट्रीय अकादमी की स्थापना की घोषणा की गई, जिसे इस क्षेत्र में समन्वित शोध, प्रशिक्षण और समुदाय-आधारित संरक्षण का केंद्र बनाने की परिकल्पना की गई है।
भारतीय ग्रामीण विरासत एवं विकास ट्रस्ट (ITRHD) द्वारा आयोजित तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से हुए इस तीन दिवसीय सम्मेलन में एशिया, यूरोप और अमेरिका से विद्वान, बौद्ध भिक्षु, विरासत संरक्षण विशेषज्ञ और नीति-निर्माता शामिल हुए। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत के सैकड़ों कम-ज्ञात ग्रामीण बौद्ध स्थलों के संरक्षण की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करना था। प्रस्तावित राष्ट्रीय अकादमी के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने पांच एकड़ भूमि आवंटित की है। इस अकादमी को ग्रामीण बौद्ध विरासत के प्रशिक्षण, प्रलेखन और समुदाय-केंद्रित संरक्षण के लिए समर्पित देश की पहली विशेषीकृत संस्था के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। भूमि आवंटन और साझा रोडमैप के साथ, दिल्ली में हुआ यह सम्मेलन ग्रामीण बौद्ध विरासत के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रस्तावित अकादमी से दीर्घकालिक शोध, प्रशिक्षण और समुदाय विकास प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है, जिससे संरक्षण को सतत ग्रामीण आजीविका से जोड़ा जा सकेगा और एशिया में बौद्ध विरासत के भविष्य को आकार देने में भारत की भूमिका और सुदृढ़ होगी।

