पणजी ,17 दिसंबर (आरएनएस)। गोवा में एक आईएएस अधिकारी की कार को चेकिंग के लिए रोकना पुलिसकर्मियों को इतना भारी पड़ गया कि उन्हें अपने ही विभाग के उच्च अधिकारी के गुस्से का शिकार होना पड़ा। उत्तरी गोवा में वीआईपी कल्चर और पुलिस प्रताडऩा का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा एक आईएएस अधिकारी की गाड़ी रोकने पर एसपी (नॉर्थ) हरिश्चंद्र मदकाइकर ने उन्हें अपने ऑफिस में बुलाकर उठक-बैठक लगाने की सजा दी। इस घटना ने पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया है और मामला पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तक पहुंच गया है, जिन्होंने एसपी की इस कार्रवाई को नियमों के खिलाफ बताया है।
घटनाक्रम के मुताबिक, ओल्ड गोवा पुलिस और इंडियन रिजर्व बटालियन (ढ्ढक्रक्चठ्ठ) के जवान सांताक्रूज इलाके में नाकाबंदी कर रहे थे। इसी दौरान पणजी की तरफ जा रही एक ‘बीआरÓ (बिहार) नंबर की कार को जवानों ने जांच के लिए रोका। कार चालक ने लाइसेंस मांगने पर अपनी आईडी दिखाई और खुद को केंद्र सरकार से जुड़ा आईएएस अधिकारी बताते हुए वहां से चला गया। लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ देर बाद वह आईएएस अधिकारी गुस्से में वापस लौटा और अपनी कार की डिक्की खोलकर सारा सामान सड़क पर फेंक दिया। उसने पुलिसकर्मियों को चुनौती देते हुए सामान चेक करने को कहा और फिर सामान वापस रखकर वहां से निकल गया। इसके बाद अधिकारी ने फोन पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से इसकी शिकायत कर दी।
इस शिकायत का असर यह हुआ कि मामले की जांच एसपी हरिश्चंद्र मदकाइकर को सौंपी गई। आरोप है कि एसपी ने ओल्ड गोवा थाने के उन पुलिसकर्मियों को पोरवोरिम स्थित अपने कार्यालय में तलब किया और सजा के तौर पर उनसे उठक-बैठक करवाई। इस घटना की जानकारी मिलते ही गोवा के डीजीपी आलोक कुमार ने सख्त रुख अपनाया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, डीजीपी ने एसपी की इस हरकत को ‘अनुचितÓ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिसकर्मियों को शारीरिक दंड देना पुलिस नियमावली का हिस्सा नहीं है। डीजीपी ने एसपी को निर्देश दिए हैं कि वे नियम पुस्तिका (रूल बुक) के हिसाब से काम करें, न कि जवानों का अपमान करें। साथ ही, उन्होंने नाकों पर तैनात स्टाफ को वाहन चेकिंग के दौरान शालीनता बरतने की भी नसीहत दी है।
इस पूरे वाकये ने गोवा पुलिस के निचले स्तर के कर्मचारियों के मनोबल पर गहरा असर डाला है। विभाग के भीतर ही इस कार्रवाई की दबी जुबान में आलोचना हो रही है। एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि अगर नियम पालन करने पर पुलिसकर्मियों को इस तरह जलील किया जाएगा, तो वे भविष्य में अपनी ड्यूटी करने और संदिग्ध वाहनों को रोकने में हिचक महसूस करेंगे। फिलहाल पुलिस मुख्यालय इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि ड्यूटी कर रहे जवानों के साथ सम्मानजनक व्यवहार हो, चाहे सामने कोई भी वीआईपी क्यों न हो।
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