पर्यावरण संगठनों ने मेयर सहित कई अधिकारियों को भेजा पत्र
कोलकाता २२ दिसंबर (आरएनएस)। प्रदूषण के कारण महानगर कोलकाता की हालत बदल रही है। महानगर कोलकाता में प्रदूषण का लेवल बढ़ रहा है। कोलकाता में सूखी पत्तियां जलाने से शहर में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। उक्त चिंता पर्यावरण संगठनों का है। उक्त संगठनों ने प्रदूषण रोकने के लिए तमाम सुझावों के साथ कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम को एक पत्र भी भेजा है। सर्दियों की शुरुआत से ही दिल्ली धुएं की चादर में लिपटी हुई है। एक शोध से पता चला है कि बड़े पैमाने पर एयर प्रदूषण का एक कारण पड़ोसी राज्यों की जमीन पर धान की पराली का जलाए जाना है। पर्यावरण संगठनों का दावा है कि कोलकाता में हवा की गुणवत्ता भी खराब हो रही है। शहर के अलग-अलग इलाकों में पेड़ों से गिरे सूखे पत्तों को अंधाधुंध जलाया जा रहा है, जिससे प्रदूषण कई गुना बढ़ रहा है। इस अनचाहे प्रदूषण को रोकने के लिए एक पर्यावरण संगठन ने मेयर फिरहाद हकीम को पुराना तरीका अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कोलकाता के मेयर के अलावा पर्यावरण और बागवानी विभाग के एक्टिंग मेयर और काउंसिल के सदस्य को भी लिखा। पर्यावरण संगठन के पत्र में कहा गया है कि वे नागरिकों के तौर पर इस घटना से चिंतित हैं। पत्ते जलाना सफाई कर्मचारियों की आदत बन गई है। एक समय में, गाडिय़ों या इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के कारण यह रास्ता अपनाया जाता था। लेकिन अब कोलकाता नगर निगम के सफाई विभाग के पास आधुनिक गाडिय़ां हैं। वेस्ट मैनेजमेंट में सुधार हुआ है, लेकिन यह घटना अभी भी हो रही है, जो सही नहीं है। यह घटना कई जगहों पर देखी गई है।
पत्र में अपील की गई है कि कोलकाता नगर निगम के हर गार्डन में एक गड्ढा बनाया जाएगा। सूखी पत्तियों को जलाने के बजाय, उन्हें वहीं जमा किया जाए। जिसे भविष्य में खाद में बदला जाएगा। इस खाद की क्वालिटी बहुत अच्छी और कीमती है। यह कम मात्रा में मिलती है। पुलिस के साथ-साथ सिक्योरिटी गाड्र्स को भी अलग-अलग इलाकों में फैले गार्डन या हाउसिंग एस्टेट में वॉलंटियर के तौर पर काम पर लगाया जाना चाहिए। पर्यावरण कर्मी बनानी कक्कड़ ने कहा, सर्दियों में पत्तियां जलाने से बहुत ज्यादा प्रदूषण होता है। इसे तुरंत रोकना चाहिए। हमने सुझाव दिया है कि हर गार्डन या हाउसिंग एस्टेट में एक गड्ढा बनाया जाए। जहां लोग कम आते-जाते हों, वहां यह गड्ढा सुरक्षित रूप से बनाया जाए और इन सभी पत्तियों को उसमें फेंक दिया जाए। इसे पानी के साथ रखा जाए। धीरे-धीरे यह खाद में बदल जाएगी। यह खाद केमिकल खाद से कहीं बेहतर क्वालिटी की है और महंगी भी है। उन्होंने आगे कहा, पहले शहर में कई जगहों पर यह तरीका अपनाया गया था। लेकिन जागरूकता की कमी के कारण यह सफल नहीं हुआ। चूंकि आम लोगों को इसके बारे में जानकारी नहीं थी, इसलिए वे वहीं कचरा फेंक देते थे। अगर पत्तों से खाद बनाई जाए, तो कोलकाता नगर निगम इसे बेचकर इनकम कर पाएगा। चूंकि पेड़ लगाने की जगह नहीं है, इसलिए कई लोग अपनी छतों और बालकनी पर पेड़ लगाते हैं। उनके बीच इस खाद की बहुत मांग है। नतीजतन, जैसे-जैसे प्रदूषण कम होगा, वैसे-वैसे इनकम भी बढ़ेगी। कोलकाता नगर निगम के एक अधिकारी ने कहा, प्रस्ताव के साथ जो पत्र आया है, उस पर जानकारों से सलाह ली जाएगी। फिर, चर्चा के बाद फैसला लिया जाएगा कि क्या ऐसा किया जा सकता है या ऐसा करने के क्या फायदे और नुकसान हैं। हालांकि, पर्यावरण को लेकर ऐसी पॉजिटिव सोच सभी के बीच बनी रहनी चाहिए। यह अच्छी बात है।
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