लखनऊ 22 दिसंबर (आरएनएस )। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) की उत्तर प्रदेश कार्यकारिणी की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले तथा प्रदेश अध्यक्ष पवन भाई गुप्ता के नेतृत्व में आयोजित की गई। बैठक में उत्तर प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, दलित-शोषित-वंचित समाज की जमीनी समस्याओं और पार्टी के संगठनात्मक विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।बैठक में बताया गया कि पवन भाई गुप्ता के नेतृत्व में पार्टी तेजी से गांव, ब्लॉक, तहसील, जिला और मंडल स्तर तक संगठन को मजबूत कर रही है। विभिन्न स्तरों पर पदाधिकारियों की नियुक्ति का उद्देश्य जनता की समस्याओं को नजदीक से समझना और उनके समाधान के लिए प्रभावी हस्तक्षेप करना है। पार्टी नेतृत्व का दावा है कि इसी रणनीति के चलते आज उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले में आरपीआई (अठावले) की सक्रिय और मजबूत उपस्थिति दर्ज हो रही है।संगठनात्मक मजबूती के बीच पार्टी ने एक बड़े जनआंदोलन की भी घोषणा की है। तय कार्यक्रम के अनुसार 5 अप्रैल 2026 को लखनऊ में एक विशाल रैली आयोजित की जाएगी, जिसमें मुफ्त शिक्षा और मुफ्त चिकित्सा की मांग को प्रमुखता से उठाया जाएगा। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह रैली दलित, शोषित, वंचित और गरीब वर्ग के अधिकारों की लड़ाई में एक निर्णायक पड़ाव साबित होगी।बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी जिला पंचायत चुनावों में प्रदेश की सभी सीटों पर आरपीआई (अठावले) अपने मजबूत और समर्पित पदाधिकारियों को मैदान में उतारेगी। पार्टी का मानना है कि स्थानीय स्तर पर चुनाव लडऩे से संगठन की जड़ें और मजबूत होंगी तथा जनता से सीधा जुड़ाव स्थापित होगा।प्रदेश की राजनीति पर चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के लंबे शासनकाल का भी उल्लेख किया गया। बैठक में कहा गया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद दलित, शोषित, वंचित, गरीब और महिलाओं की शिक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई ठोस और व्यापक सुधार नहीं हो सका। इन मुद्दों पर स्थिति आज भी लगभग जस की तस बनी हुई है। पार्टी नेताओं ने कहा कि आरपीआई (अठावले) केवल नारेबाजी की राजनीति नहीं करती, बल्कि धरातल पर काम कर वास्तविक बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है।बैठक में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के संकल्प को दोहराया गया। नेताओं ने कहा कि सामाजिक न्याय, समता, स्वतंत्रता, बंधुता और मानव गरिमा के सिद्धांत आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। संविधान के माध्यम से बाबा साहेब ने हर नागरिक को समान अधिकार, सम्मान और अवसर का मार्ग दिखाया। आज समाज में मौजूद जातिवाद, अस्पृश्यता और असमानता के खिलाफ उनकी शिक्षाएं सबसे सशक्त हथियार हैं। साथ ही राम मनोहर लोहिया के उस सपने का भी उल्लेख किया गया, जिसमें आर्थिक और सामाजिक असमानता से मुक्त भारत की परिकल्पना की गई थी।राजनीतिक विमर्श के दौरान अखिलेश यादव द्वारा दिए गए पीडीए नारे पर भी सवाल उठाए गए। बैठक में कहा गया कि यह नारा चुनावी घोषणा तक सीमित रह गया और जमीनी स्तर पर इसके ठोस परिणाम दिखाई नहीं देते। इसके विपरीत आरपीआई (अठावले) डीपीए यानी दलित, पिछड़ा और अल्पसंख्यक की अवधारणा को लेकर जमीन पर सक्रिय संघर्ष करने और वास्तविक परिवर्तन लाने के लिए आगे बढ़ रही है।पार्टी ने यह भी दावा किया कि एक करोड़ सक्रिय सदस्यों का लक्ष्य तेजी से पूरा होने की दिशा में है और यह संगठनात्मक शक्ति बाबा साहेब के मिशन को आगे बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। बैठक के अंत में राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास आठवले, प्रदेश अध्यक्ष पवन भाई गुप्ता और मीडिया प्रभारी डॉ. एस पी सिंह ने सभी कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर दलित-शोषित समाज के उत्थान के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि आरपीआई (अठावले) उत्तर प्रदेश में एक नई उम्मीद और परिवर्तन की लहर बनकर उभर रही है।
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