महफि़ल शुआ ए नूर का तिहत्तरवां दौर आयोजित
प्रयागराज 22 दिसंबर (आरएनएस)। बख्शी बाजार स्थित मस्जिद क़ाज़ी जी में पैगम्बर ए इस्लाम हजऱत मुहम्मद ए मुस्तफा (स0अ0व0)की इकलौती बेटी मासूमा ए कौनैन हजऱत फात्मतुज़ ज़हरा की विलादत बा सआदत के मौक़े पर मरहूम ज़ाकिर ए अहलेबैत ज़ायर हुसैन द्वारा क़ायम महफि़ल शुआ ए नूर का तिहत्तरवां दौर मुक़ामी व ग़ैर मुक़ामी शायरों के बेहतरीन कसीदे के साथ सम्पन्न हुआ।
मौलाना सैय्यद हसन रज़ा ज़ैदी इमाम जुमा चक शिया जामा मस्जिद की अध्यक्षता व अनीस रिज़वी जायसी के संचालन में शायरों ने एक से बढ़ कर एक शेर सुना कर जमकर वाह वाही बटोरी। ज़ाकिर ए अहलेबैत रज़ा अब्बास ज़ैदी ने फात्मा ज़हरा की शान की फजीलत बयान की तो शायर हसनैन मुस्तफाबादी ने पढ़ा। फात्मा तेरी फज़ीलत के लिए यह कम नहीं। हो मुफस्सिर कोई तेरा जि़क्र है तफसीर में! यह शरफ ख़ालिक़ ने रक्खा शाहे खैबरगीर ने। मौलाना आमिरुर रिज़वी ने पढ़ा। हां इज़ाफ़ा है यह मेरी इजज़़तो तौक़ीर में। तर ज़बां हो फिर से मदहे मादरे शब्बीर में। ज़मीर भोपतपूरी ने कुछ इस अन्दाज़ में पढ़ा।मदहाख्वानी है अगर मदहा की तक़दीर में। इश्के ज़हरा का असर है खून की तासीर में।। बाहरी शायरों में खादिम शब्बीर नसीराबादी, बाकऱ बलियावी, दिलकश ग़ाज़ीपुरी, अहमद सज्जाद लखनवी, मायल चन्दौलवी, शहंशाह मिजऱ्ापुरी , आदि ने देर रात तक चली महफि़ल शुआ ए नूर में जमकर नूर की बारिश की।
महफि़ल में मौलाना हसन रज़ा ज़ैदी, मौलाना जव्वादुल हैदर रिज़वी, मौलाना अफज़़ल अब्बास, मौलाना इरफान ज़ैदी, मौलाना जाबिर अब्बास, मौलाना शहरयार हुसैन, मौलाना खादिम अब्बास, मौलाना मोहम्मद ताहिर, मौलाना मीर कल्बे अब्बास, मौलाना सरफराज़ हुसैन, गौहर काज़मी, काजि़म अब्बास, अहमद जावेद कज्जन बाकिऱ अब्बास, अख्तर अली, मक़सूद रिज़वी ,फरमान रज़ा ,सैय्यद मोहम्मद अस्करी, बाकऱ मेंहदी, जऱग़ाम हैदर आदि शामिल रहे।
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