-विरोध प्रदर्शन कर नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन
अयोध्या 22 दिसंबर (आरएनएस)। वामदलों ने मोदी सरकार के प्रस्तावित Óविकसित भारत – जी राम जीÓ विधेयक को विकसित भारत के आवरण में लिपटा प्रतिगामी विधेयक बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की है। भाकपा, माकपा और भाकपा (माले) ने देशव्यापी कार्यक्रम के तहत सोमवार को तहसील सदर पर विरोध प्रदर्शन कर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा। ज्ञापन में इसे पहले से मौजूद मनरेगा कानून और उसमें दिए गए ग्रामीण रोजगार गारंटी के कानूनी व सार्वभौमिक अधिकार को खत्म करने की साजिश करने वाला विधेयक कहा है। वामदलों ने मनरेगा को ज्यादा मजदूर हितैषी बताया है और इसमें रोजगार के दिन बढ़ाकर 200 दिन व प्रतिदिन मजदूरी कम से कम 600 रुपये करते हुए इसे और मजबूत करने की जरुरत पर बल दिया है। ज्ञापन में कहा गया कि Óजी राम जीÓ विधेयक का सबसे आपत्तिजनक पहलू यह है कि किसी राज्य के ग्रामीण इलाके में रोजगार देने की जरुरत है – यह केंद्र सरकार के विवेक पर है और वही अधिसूचित करेगी। जबकि मनरेगा में हरेक ग्रामीण क्षेत्र में अकुशल श्रम करने के इच्छुक मजदूर परिवार को कानूनी तौर पर रोजगार देने की गारंटी है। प्रस्तावित विधेयक में केंद्र सरकार ने बजट में अपना हिस्सा 90 से घटाकर 60 प्रतिशत कर लिया है। राज्यों का अब 10 की जगह 40 प्रतिशत व्यय भार वहन करना होगा। यह मनरेगा के प्रति मोदी सरकार ने शुरु से ही जारी अपने नकारात्मक रवैये को इस विधेयक में संस्थाबद्ध किया है। तीसरी बात, नए विधेयक में खेती के व्यस्त मौसम के दौरान 60 दिनों के लिए रोजगार गारंटी नहीं मिलेगी। यह बेहद मजदूर-विरोधी खासकर महिला मजदूरों के खिलाफ प्रावधान है, जिन्हें सबसे ज्यादा काम की जरुरत होती है। इस अवसर पर भाकपा जिला सचिव अशोक कुमार तिवारी, माकपा जिला सचिव अशोक यादव, भाकपा (माले) राज्य कमेटी सदस्य राम भरोस, मया राम वर्मा, रामजी राम यादव, विनोद सिंह, उदयचंद यादव, ओमप्रकाश यादव, घनश्याम यादव, राम मूरत शीला, यशोदा नन्दन कृष्ण, कुसुम आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
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