भुवनेश्वर 24 Dec, (Rns): उत्तर प्रदेश में आयोजित 69वीं राष्ट्रीय स्कूल कुश्ती चैंपियनशिप में हिस्सा लेने गए ओडिशा के होनहार खिलाड़ियों के साथ घोर लापरवाही और अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है। राज्य का नाम रोशन करने निकले इन बच्चों को सम्मान तो दूर, ढंग से सफर करना भी नसीब नहीं हुआ। मास एजुकेशन विभाग की कथित बदइंतजामी के चलते 18 युवा खिलाड़ियों, जिनमें 10 लड़के और 8 लड़कियां शामिल हैं, को कड़ाके की ठंड में ट्रेन के सामान्य डिब्बे में टॉयलेट के पास और फर्श पर बैठकर यात्रा करनी पड़ी। आरोप है कि विभाग ने समय रहते इन खिलाड़ियों के लिए कन्फर्म टिकट का इंतजाम नहीं किया था।
इस बदहाली का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पूरे ओडिशा में रोष पैदा कर दिया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि छोटे-छोटे बच्चे ट्रेन के टॉयलेट के पास दयनीय स्थिति में बैठे हैं। खेल प्रेमियों और अभिभावकों ने तीखे सवाल उठाए हैं कि जब ये बच्चे राष्ट्रीय मंच पर राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, तो उनके साथ ऐसा दोयम दर्जे का व्यवहार क्यों किया गया। लोगों का कहना है कि यह घटना न सिर्फ प्रशासनिक संवेदनहीनता को उजागर करती है, बल्कि यह भी बताती है कि सिस्टम की नजर में युवा प्रतिभाओं के सम्मान की कोई कीमत नहीं है।
इस मुद्दे पर राजनीति भी गर्मा गई है। बीजू जनता दल (BJD) की राज्यसभा सांसद सुलता देव ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘डबल इंजन सरकार’ की विफलता बताया है। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक है और सरकार 17 महीनों में ही फेल साबित हो चुकी है। सांसद ने भावुक होते हुए कहा, “जो बच्चे ट्रेन में बाथरूम के पास बैठकर गए, उनके मासूम दिमाग पर इसका क्या असर पड़ेगा? मां-बाप लाड-प्यार से बच्चों को पालते हैं, अगर आप उन्हें सम्मानजनक तरीके से नहीं ले जा सकते, तो मत ले जाइए, लेकिन यूं बेइज्जती मत कीजिए।” उन्होंने सवाल किया कि क्या कोई अधिकारी अपने बच्चों को इस तरह टॉयलेट के पास बिठाकर सफर करा सकता है?
सुलता देव ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे खुद ओडिशा से हैं, क्या उन्हें जानकारी नहीं थी कि बच्चों का रिजर्वेशन नहीं है? सांसद ने सुझाव दिया कि बच्चों के अभिभावकों को विभाग पर केस करना चाहिए और अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भेजना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसी मानसिक प्रताड़ना के बाद बच्चों से मेडल की उम्मीद करना तो दूर, वे ठीक से खेल भी नहीं पाएंगे। फिलहाल, स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है, लेकिन जनता की मांग है कि दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में खिलाड़ियों के साथ ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।

