नई दिल्ली 30 Dec, (Rns): अक्सर देखा जाता है कि हल्की खांसी, सर्दी-जुकाम या बदन दर्द होते ही लोग बिना डॉक्टर को दिखाए मेडिकल स्टोर से दवा लाकर खा लेते हैं। अगर आप भी सालों से ऐसा कर रहे हैं, तो अब सावधान हो जाएं क्योंकि यह आदत आपकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताई है। पीएम ने देशवासियों से अपील की है कि वे एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल सोच-समझकर करें, क्योंकि इनका बेजा इस्तेमाल भविष्य में इलाज को मुश्किल बना रहा है।
वायरल में दवा खाने से बढ़ रहा है ‘एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस’
आईसीएमआर (ICMR) की हालिया स्टडी में भी चेतावनी दी गई है कि बिना वजह एंटीबायोटिक का सेवन देश में ‘एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस’ (AMR) का खतरा तेजी से बढ़ा रहा है। मेडिकल साइंस के मुताबिक, एंटीबायोटिक दवाएं केवल बैक्टीरियल इन्फेक्शन में काम करती हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में लोग वायरल बुखार, फ्लू और सामान्य सर्दी-जुकाम में भी इनका धड़ल्ले से सेवन कर रहे हैं। सफदरजंग अस्पताल के डॉ. जुगल किशोर बताते हैं कि जब हम बिना जरूरत दवा खाते हैं, तो शरीर में मौजूद बैक्टीरिया इन दवाओं के प्रति अभ्यस्त हो जाते हैं और अपनी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं। नतीजा यह होता है कि जब सच में जरूरत पड़ती है, तो ये दवाएं मरीज पर असर करना बंद कर देती हैं।
WHO ने बताया ‘साइलेंट पैंडेमिक’, निमोनिया की दवा भी हो रही फेल
दिल्ली के जीटीबी अस्पताल के डॉ. अजीत कुमार ने इसे एक गंभीर स्थिति बताते हुए कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी इसे ‘साइलेंट पैंडेमिक’ (मौन महामारी) घोषित कर चुका है। उन्होंने चिंता जताई कि मेडिकल स्टोर पर बिना पर्ची के आसानी से एंटीबायोटिक मिलना इस समस्या को और बढ़ा रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि अब सामान्य यूरिन इन्फेक्शन (UTI) से लेकर निमोनिया तक के इलाज में इस्तेमाल होने वालीं दवाएं भी मरीजों पर बेअसर साबित हो रही हैं। डॉ. कुमार का कहना है कि पीएम मोदी द्वारा इस मुद्दे को उठाना बेहद अहम है, क्योंकि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले सालों में सामान्य बीमारियां भी जानलेवा साबित हो सकती हैं।
खुद डॉक्टर न बनें, कोर्स पूरा करना जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि निमोनिया, टाइफाइड, यूटीआई और टीबी जैसी गंभीर समस्याओं में ही एंटीबायोटिक की जरूरत पड़ती है, वह भी डॉक्टर की सलाह पर। आम लोगों के लिए डॉक्टरों की सलाह है कि वे सर्दी-जुकाम जैसे वायरल इन्फेक्शन में एज़िथ्रोमाइसिन जैसी दवाएं न खाएं, क्योंकि ये वायरल तीन-चार दिन में खुद ठीक हो जाते हैं। साथ ही, अगर डॉक्टर दवा दें तो उसका पूरा कोर्स करें। न तो ओवरडोज लें, न डोज कम करें और न ही पुरानी बची हुई दवाओं का दोबारा इस्तेमाल करें।

