शिमला ,02 जनवरी (आरएनएस)। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) के कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के राज्य सरकार के निर्णय पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्थानांतरण के आदेश पर अंतिम रोक बरकरार रखी है। सुनवाई के दौरान अदालत को सूचित किया गया कि हिमाचल प्रदेश में रेरा के तहत पंजीकृत लगभग 80 प्रतिशत रियल एस्टेट परियोजनाएं सोलन, शिमला और सिरमौर जिलों में केंद्रित हैं। इसके विपरीत कांगड़ा जिले में केवल लगभग 20 पंजीकृत परियोजनाएं हैं।
पीठ ने उल्लेख किया कि नियामक प्राधिकरण के मुख्यालय को स्थानांतरित करने के पीछे के प्रशासनिक तर्क का आकलन करते समय परियोजनाओं का यह भौगोलिक वितरण एक महत्वपूर्ण कारक है। राज्य सरकार ने अपने जवाब में खुलासा किया कि रेरा में स्वीकृत 43 पदों में से वर्तमान में केवल 36 कर्मचारी काम कर रहे हैं। इनमें से 19 कर्मचारी ‘आउटसोर्सÓ आधार पर कार्यरत हैं। अदालत ने कर्मचारियों की सीमित संख्या पर ध्यान देते हुए टिप्पणी की कि इतनी कम कर्मचारी संख्या वाले संस्थान को स्थानांतरित करने से कोई ठोस प्रशासनिक लाभ नहीं होगा।
पीठ ने कहा कि यदि रेरा कार्यालय को धर्मशाला स्थानांतरित किया जाता है, तो ‘डेवलपरोंÓ को पहले वहां के कार्यालय जाना पड़ेगा और फिर अन्य संबंधित अनुमतियां प्राप्त करने के लिए वापस शिमला आना पड़ेगा। इससे हितधारकों के लिए प्रक्रिया बोझिल और असुविधाजनक हो जाएगी। महाधिवक्ता ने सरकार के निर्णय का बचाव करते हुए तर्क दिया कि इस कदम का उद्देश्य शिमला में भीड़भाड़ कम करना और कांगड़ा जिले के विकास को बढ़ावा देना था। अदालत हालांकि इस तर्क से सहमत नहीं हुई और माना कि वर्तमान परिस्थितियों में स्थानांतरण से कोई सार्थक सार्वजनिक या प्रशासनिक उद्देश्य सिद्ध होता प्रतीत नहीं होता है।
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