लखनऊ 2 जनवरी (आरएनएस )। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने 2 जनवरी को विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं विभागों से जुड़े गैर-शिक्षण अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. विक्रम सिंह यादव, वित्त अधिकारी डॉ. अजय कुमार मोहंती तथा पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. सुनील गोरिया प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय से जुड़ी गैर-शैक्षणिक गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा की गई तथा प्रशासनिक, तकनीकी और सहायक सेवाओं की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की गई।संवाद के दौरान भविष्य की संभावनाओं, उभरती चुनौतियों और प्रशासनिक तंत्र को अधिक सुदृढ़, प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने के उपायों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय के समग्र विकास को नई दिशा देना और कार्यसंस्कृति को और अधिक परिणामोन्मुख बनाना रहा।
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारी एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं। दोनों की समान भागीदारी और समन्वय से ही संस्थान सुचारु रूप से आगे बढ़ता है। उन्होंने विशेष रूप से नॉन-टीचिंग कर्मचारियों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रशासनिक, तकनीकी और सहायक सेवाओं के बिना शैक्षणिक गुणवत्ता की कल्पना संभव नहीं है। सभी को एक साझा रोडमैप को समझते हुए मिल-जुलकर कार्य करना चाहिए, ताकि गुणवत्ता-आधारित शिक्षा सुनिश्चित की जा सके।प्रो. मित्तल ने कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य ऐसे युवाओं का निर्माण करना है जो नेतृत्व की भूमिका निभाते हुए समाज को दिशा दे सकें। सशक्त नेतृत्व वाले संस्थानों के परिणाम और प्रतिष्ठा दोनों ही उत्कृष्ट होते हैं। उन्होंने कौशल-आधारित और मूल्य-आधारित शिक्षा को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि समाज में व्याप्त अनेक समस्याओं का समाधान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में निहित है। एक उच्च शिक्षण संस्थान होने के नाते यह शिक्षण एवं विशेष रूप से गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर की विचारधारा के अनुरूप शिक्षा के माध्यम से एक प्रगतिशील, समावेशी और समान विकास वाला समाज तैयार किया जाए।कुलपति ने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय स्वयं को आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित करने की दिशा में लगातार प्रयासरत है, ताकि विद्यार्थियों को अत्याधुनिक सुविधाओं का लाभ मिल सके और शैक्षणिक वातावरण को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित किया जा सके।कार्यक्रम के दौरान कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. विक्रम सिंह यादव, वित्त अधिकारी डॉ. अजय कुमार मोहंती और पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. सुनील गोरिया ने भी नॉन-टीचिंग कर्मचारियों की भूमिका, उनकी कार्यकुशलता, समर्पण और विश्वविद्यालय की प्रगति में उनके महत्वपूर्ण योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि गैर-शिक्षण स्टाफ की दक्षता और प्रतिबद्धता के बिना संस्थान का सुचारु संचालन संभव नहीं है।इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों और विभागों से जुड़े बड़ी संख्या में गैर-शिक्षण अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। संवाद कार्यक्रम को विश्वविद्यालय में सहभागिता, पारदर्शिता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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