टीकमगढ़ 02 Jan, (Rns) । औलाद की कुशलता और उसकी चाहत में एक पिता कैसे कैसे कष्ट और तकलीफे उठाकर भी ईश्वर से मांगी अपनी मन्नत पूरी करने इस भीषण ठण्ड में अमरावती महाराष्ट्र से लुढ़कते हुए सड़क मार्ग से माता वैष्णव देवी की कठिन यात्रा पर निकला हुआ है। दरअसल महाराष्ट्र के जिला अमरावती निवासी देवी दास नाम के व्यक्ति की बेटी को जबरदस्त तरीके से करंट लगा था और बेटी की हालत नाजुक थी। डॉक्टरों ने भी बेटी के बचने की उम्मीद छोड दी थी , ऐसे वक्त में एक देवी भक्त पिता ने माँ वैष्णो देवी से प्रार्थना की थी कि यदि उसकी बेटी की जान बच गई तो वह माँ आपके दरबार मे लुढ़कते हुए हाजिरी लगाएगा।
माँ के चमत्कार से उसकी बेटी की ना केवल जान बच गई, बल्कि प्लास्टिक सर्जरी के बाद वह सामान्य भी हो गई। जिसके बाद पिता अपनी मन्नत व कसम पूरी करने घर से लुढ़कते हुए निकल पड़े औऱ आज मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले से गुजरने के दौरान उनकी लगभग 850 किलोमीटर की यात्रा पूरी हो चुकी है और अभी 1200 किलोमीटर की यात्रा उनकी बाकी है, जो लगभग लगभग 60 दिनों में पूरी होंगी।
देवी दास के बताए अनुसार वह यह यात्रा अपने एक साथी के साथ सम्पन्न कर रहे है जो साईकल से उनके साथ चलते है और इसी सायकल पर उनका सारा जरूरत का सामान होता है। लुढ़कने के दौरान पिता के दोनों हाथों और पैरो में लोहे की चैन की बेड़ियाँ बंधी हुई होती है , देवीदास के बताए अनुसार वह प्रतिदिन लगभग 12 किलोमीटर की यात्रा लुढ़कते हुए पूरी कर लेते है इसके बाद जहा उन्हें कोई सुरक्षित स्थान मिल जाता है तो वहाँ वह रुक जाते है और फिर दिन होते ही आगे की यात्रा पर निकल पड़ते है। उनका बेटी की प्राण रक्षा का यह प्रण और कठिन संकल्प पूरा करने का जज्बा समाज और उन परिवारों के लिए एक सबक है जहाँ बेटी की तुलना में बेटों को आज भी ज्यादा महत्व दिया जाता है।

