लखनऊ 5 जनवरी (आरएनएस ) उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश राज्य आजीविका मिशन, ग्राम्य विकास विभाग के माध्यम से दीनदयाल अन्त्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों और सामुदायिक संस्थाओं के जरिए महिलाओं को संगठित कर सतत आजीविका से जोड़ा जा रहा है। इस अभियान का मूल उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनके जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाना है।आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं को कृषि और गैर-कृषि आधारित गतिविधियों से जोड़ते हुए ‘लखपति दीदीÓ बनाने के लक्ष्य पर युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। विभिन्न विभागीय योजनाओं के आपसी समन्वय से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अपनी आय में निरंतर वृद्धि कर रही हैं। खासतौर पर दुग्ध उत्पादन और विपणन से जुड़ी गतिविधियां ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का सशक्त माध्यम बनकर उभरी हैं।ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में दुग्ध वैल्यू चेन के अंतर्गत गठित मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनियों ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। बुन्देलखण्ड क्षेत्र में संचालित बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी इस पहल का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई है। बलिनी ने महिलाओं को केवल दुग्ध उत्पादन से ही नहीं जोड़ा, बल्कि उन्हें एक संगठित व्यवस्था के तहत आत्मनिर्भर बनाकर आधी आबादी के स्वावलंबन की मिसाल कायम की है।राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी की स्थापना वर्ष 2019 में जनपद झांसी में की गई थी। इस कम्पनी का मुख्य उद्देश्य महिला दुग्ध उत्पादकों के हितों की रक्षा करना, पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से दुग्ध संग्रहण, समयबद्ध भुगतान, क्षमता निर्माण और पशुधन से जुड़ी सहायता सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसके तहत पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था, कृत्रिम गर्भाधान और गुणवत्तायुक्त पशु आहार जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं, जिससे दुग्ध उत्पादन में निरंतर वृद्धि हो रही है।बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी द्वारा दुग्ध संग्रहण से लेकर भंडारण तक की पूरी प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर दी गई है। इससे किसानों और महिला दुग्ध उत्पादकों को अपने उत्पाद का सीधा और पूरा लाभ मिल रहा है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।वर्तमान में बुन्देलखण्ड के सातों जनपदों के 1351 ग्रामों से लगभग 90 हजार महिलाएं प्रतिदिन 2.72 लाख लीटर से अधिक दुग्ध का संग्रह कर रही हैं। इनमें से करीब 20 हजार महिलाएं ‘लखपति दीदीÓ की श्रेणी में शामिल हो चुकी हैं। प्रदेश स्तर पर दुग्ध वैल्यू चेन के अंतर्गत बलिनी, सामथ्र्य, काशी, बाबा गोरखनाथ और सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनियों के माध्यम से 31 जनपदों के 5205 ग्रामों में 2.89 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों से प्रतिदिन 9.15 लाख लीटर से अधिक दुग्ध का संग्रह किया जा रहा है। इन प्रयासों के फलस्वरूप अब तक 45,611 से अधिक महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच चुकी हैं।ग्रामीण महिलाओं की यह सामूहिक और संगठित पहल न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि प्रदेश में समावेशी विकास और महिला सशक्तिकरण के लक्ष्य को भी साकार कर रही है। आजीविका मिशन के माध्यम से गांव की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं, जो आने वाले समय में प्रदेश के सामाजिक और आर्थिक विकास की मजबूत नींव बनेगी।
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