सुल्तानपुर 5 जनवरी (आरएनएस )। जनपद के विवेक नगर में विवेक शाखा के तत्वावधान में आयोजित विशाल हिंदू सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन चेतना और सामाजिक आत्ममंथन का जीवंत मंच बनकर उभरा। लगभग 500 से अधिक जागरूक नागरिकों की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि समाज आज भी अपने मूल्यों, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान के प्रति सजग है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दंडी स्वामी जी, अध्यक्ष वीरेंद्र मिश्रा, प्रमुख वक्ता डॉ. ए. के. सिंह तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. डी. एस. मिश्रा, डॉ सीता शरण त्रिपाठी के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण की प्रतिबिंब ममता त्रिपाठी, सरिता यादव, राकेश पांडे, राधेश्याम पांडेय, इंद्रदेव मिश्रा, अरुण दूबे, विजय सिंह, राम शुक्ल, विनय यादव, डॉक्टर केशव गुप्ता, कल्पना जी के अतिरिक्त जनपद की अनेक गणमान्य विभूतियों की गरिमामयी उपस्थिति ने इस सम्मेलन को वैचारिक ऊँचाई प्रदान की। कार्यक्रम का सफल संयोजन शिवमूर्ति पांडे, सदस्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बाल कल्याण समिति, सुल्तानपुर के सौजन्य से संपन्न हुआ, जो सामाजिक दायित्व और सांस्कृतिक चेतना का उत्कृष्ट उदाहरण है। ओजस्वी उद्बोधन में श्री दंडी स्वामी जी ने वेद, वेदांग, उपनिषद एवं भारतीय शास्त्रों के सशक्त उदाहरणों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि हिंदू संस्कृति केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने की वैज्ञानिक और नैतिक पद्धति है। उनका वक्तव्य श्रोताओं को अपनी जड़ों से जुडऩे का आह्वान करता प्रतीत हुआ। डॉ. ए. के. सिंह ने अत्यंत विद्वतापूर्ण शैली में आर एस एसÓ की उत्पत्ति, उसकी प्रकृति, क्रियाकलाप एवं ऐतिहासिक विकास पर प्रकाश डालते हुए यह बताया कि यह किस प्रकार मानव भावनाओं को परिष्कृत कर समाज को संस्कारित करता है। उनका वक्तव्य बौद्धिक वर्ग के लिए विशेष प्रेरणास्रोत रहा। निस्संदेह, यह हिंदू सम्मेलन सांस्कृतिक पुनर्जागरण, सामाजिक एकता और वैचारिक चेतना का सशक्त उदाहरण है। ऐसे आयोजन आज के समय में अत्यंत आवश्यक हैं, जो समाज को उसकी पहचान, उद्देश्य और उत्तरदायित्व से जोडऩे का कार्य करते हैं। यही इस सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि और सार्थकता है।
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