आजमगढ़ 08 जनवरी(आर एन एस) जिला कृषि रक्षा अधिकारी हिमांचल सोनकर ने जनपद के किसान बन्धुओं को सूचित एवं समस्त थोक/फुटकर कीटनाशी विक्रेता को निर्देशित करते हुये अवगत कराया है कि कीटनाशी अधिनियम-1968 एवं कीटनाशी नियम-1971 में दी गयी व्यवस्था का पालन अनिवार्य रुप से करते हुये व्यापार किया जायेगा, जिसके क्रम में कृषकों को गुणवत्तायुक्त कीटनाशी रसायन उपलब्ध करानें एवं नकली, अपंजीकृत, बिना लाइसेन्स के कीटनाशी उत्पादन बिक्री को हतोत्साहित करने हेतु कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, भारत सरकार द्वारा एकीकृत कीटनाशक प्रबंधन प्रणाली को विकसित किया गया है। एकीकृत कीटनाशी प्रबंधन प्रणाली राष्ट्रीय स्तर का पोर्टल है, जो भारत के सभी राज्यों में कीटनाशक लाइसेंसिग, गुणवत्ता नियंत्रण, ट्रैसेबिलिटी और कीटनाशक मूल्य श्रंखला की निगरानी से जुडी मौजूदा कमियों को दूर करता है और समस्याओं का समाधान करता है। राष्ट्रीय स्तर पर विकसित एकीकृत कीटनाशक प्रबंधन प्रणाली केवल तकनीकी प्लेटफार्म नहीं है, बल्कि यह देश/राज्य/जनपद के किसानों की खेती को सुरक्षित, किफायती और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक समग्र समाधान प्रदान करता है। इसकें माध्यम से किसानों को निम्नलिखित प्रमुख लाभ मिलेगें, जिसका विवरण निम्नवत है।
-गुणवत्तापूर्ण कीटनाशी रसायनों की सुनिश्चित उपलब्धता-
पोर्टल पर हर पंजीकृत नाशीजीव उत्पाद और उसकी आपूर्ति श्रंखला की डिजिटल निगरानी होगी। इससें यह सुनिश्चित होगा कि किसानों तक केवल परीक्षित, पंजीकृत और मानक गुणवत्ता वाले कीटनाशक ही पहुंचे। अवैध या निम्न-गुणवत्ता वाले उत्पादों के कारण फसल की हानि या आर्थिक नुकसान की सम्भावना कम होगी।
2-नकली और मिलावटी उत्पादों से सुरक्षा-
एकीकृत कीटनाशी प्रबंधन प्रणाली की रियल-टाइम टैंकिग व्यवस्था हर बैच का विवरण रखेगी। विक्रय किये जा रहे कीटनाशी रसायनों की किसानों को क्यूआर कोड या यूनिक आईडी के माध्यम से उत्पाद का श्रोत और प्रमाणिकता तुरन्त पता चल सकेगी।
3-फसल सुरक्षा में त्वरित सहायता-
पोर्टल के माध्यम से नाशीजीव की उपलब्धता का अद्यतन डेटा/विवरण मिलेगा, जिससे आकस्मिक कीट प्रकोप या बीमारी के समय तुरन्त आवश्यक रसायन या जैव-नाशीजीव उपलब्ध करायें जा सकेंगे। उचित समय पर सही दवा मिलनें से फसल का नुकसान न्यूनतम होगा और किसान अपनी उपज को कीट, रोग, खरपतवार के प्रकोप से बचा पायेगें। इससे किसानों को नकली, मिलावटी या अवैध कीटनाशक खरीदनें का जोखिम लगभग समाप्त होगा।
4-नीतिगत एवं वैज्ञानिक सहायता-
एकीकृत कीटनाशी प्रबंधन प्रणाली से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग सरकार भविष्य की फसल सुरक्षा नीतियों, सब्सिडी योजनाओं और आपूर्ति रणनीतियों के निर्माण में करेगी। इससे किसानों को मांग के अनुरुप नीतियां और समय पर सरकारी समर्थन मिलेगा, जैसे कि अनुदान, प्रशिक्षण और सामयिक कृषि रक्षा रसायनों की उपलब्धता।
5-उपज में वृद्धि और लागत में कमी-
प्रमाणित और सही मात्रा में कीटनाशी रसायनों का प्रयोग फसल में होने वाले कीट, रोग, नुकसान को घटायेगा। इससे फसल का उत्पादन बढ़ेगा, गुणवत्ता सुधरेगी, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और आय में सीधा लाभ होगा।
6-पारदर्शिता और किसानों का विस्वास बढऩा-
कीटनाशी रसायनों की पूरी आपूर्ति श्रंखला (उत्पादन से लेकर बिक्री तक) की डिजिटल पारदर्शिता किसानों में विस्वास पैदा करेगी। किसान निश्चित होकर सही दवा का चुनाव कर सकेगें।
एकीकृत कीटनाशी प्रबंधन पोर्टल पर पंजीकरण हेतु सामान्य निर्देश-
एकीकृत कीटनाशी प्रबंधन प्रणाली पोर्टल (222.द्बश्चद्वह्य.द्दश1.द्बठ्ठ) पर उत्तर प्रदेश/जनपद के सभी विनिर्माता/विक्रेताओं को पंजीकरण किया जाना अनिवार्य है। पंजीकरण हेतु आवश्यक जानकारी (विक्रेता का नाम, कीटनाशी विक्रय लाइसेन्स नम्बर, लाइसेन्स जारी करने का दिनांक, प्राधिकरण प्रमाण पत्र नम्बर, प्राधिकरण प्रमाण पत्र की वैधता, प्राधिकरण प्रमाण पत्र जारी करने का दिनांक, उत्पाद का नाम, विक्रेता का पता, राज्य का एलजीडी, जिले का एलजीडी को भरा जाना हैं। जनपद स्तर पर इसके नोडल जिला कृषि रक्षा अधिकारी एवं प्रदेश स्तर पर इसके नोडल अपर कृषि निदेशक (कृ0र0) महोदय उत्तर प्रदेश होगें। इस पोर्टल के माध्यम से वास्तविक समय में कीटनाशी स्टाक, बिक्री और विनिर्माण की स्थिति की जानकारी प्राप्त हो सकेगी, जिससे अपंजीकृत, नकली, मिलावटी, कालातीत तथा बिना पक्की रसीद एवं बिना लाइसेन्स के कीटनाशी रसायनों का व्यापार एवं निर्माण पर प्रभावी रोकथाम सम्भव हो सकेगी।उपरोक्त के क्रम में जनपद के थोक/फुटकर कीटनाशी विक्रेताओं को निर्देशित किया जाता है कि अपने कीटनाशी प्रतिष्ठान का पंजीकरण एकीकृत कीटनाशी प्रबंधन प्रणाली पोर्टल पर तत्काल शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर करना सुनिश्चित करें। पंजीकरण से सम्बन्धित किसी प्रकार की समस्या होने पर कार्यालय में कार्यरत वरिष्ठ प्राविधिक सहायक ग्रुप-ए के मोबाईल नम्बर-6388226627 एवं वरिष्ठ सहायक मोबाईल नम्बर-7007507699 पर सम्पर्क करके दूर किया जा सकता है। पोर्टल पर पंजीकरण की कार्यवाही शासन की विशेष प्राथमिकताओं का होने के कारण किसी कीटनाशी विक्रेताओं द्वारा पंजीकरण न कराये जाने की दशा में सम्बन्धित के विरुद्ध कीटनाशी अधिनियम-1968 एवं कीटनाशी नियम-1971 के सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत नियमानुसार कठोर कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी। जिसके सम्बन्धित विक्रेता स्वंय जिम्मेदार होगा।
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