नई दिल्ली,09 जनवरी। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था वर्ष 2026 में 6.6 प्रतिशत की दर से बढऩे का अनुमान है. संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि मजबूत घरेलू खपत, सार्वजनिक निवेश और नीतिगत समर्थन के कारण भारत चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल में भी असाधारण प्रदर्शन करेगा.
यूएन के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (हृ ष्ठश्वस््र) द्वारा जारी ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक सिचुएशन एंड प्रॉस्पेक्ट्स 2026Ó रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की विकास दर 2025 में 7.4 प्रतिशत से घटकर 2026 में 6.6 प्रतिशत हो सकती है, लेकिन इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढऩे वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा.
रिपोर्ट के अनुसार, निजी खपत की मजबूती, मजबूत सार्वजनिक निवेश, हालिया कर सुधार और कम ब्याज दरें निकट अवधि में विकास को सहारा देंगी. हालांकि, यदि मौजूदा दरें बनी रहती हैं तो अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ 2026 में भारत के निर्यात को प्रभावित कर सकते हैं, क्योंकि भारतीय निर्यात का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा अमेरिकी बाजार में जाता है.
यूएन ने स्पष्ट किया कि टैरिफ का असर कुछ उत्पादों पर पड़ सकता है, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन जैसे प्रमुख निर्यात इससे काफी हद तक मुक्त रहने की उम्मीद है. इसके अलावा यूरोप और मध्य पूर्व जैसे बाजारों से मजबूत मांग अमेरिकी टैरिफ के असर को आंशिक रूप से संतुलित कर सकती है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि आपूर्ति पक्ष पर विनिर्माण और सेवा क्षेत्र का निरंतर विस्तार भारत की वृद्धि का प्रमुख आधार बना रहेगा. साथ ही मजबूत घरेलू खपत और सार्वजनिक निवेश, ऊंचे अमेरिकी टैरिफ के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक संतुलित करेंगे.
यूएन डेसा के वरिष्ठ अर्थशास्त्री इंगो पिटरले ने कहा कि दक्षिण एशिया 5.6 प्रतिशत की दर से दुनिया का सबसे तेजी से बढऩे वाला क्षेत्र बना रहेगा और इसमें सबसे बड़ा योगदान भारत का होगा . उन्होंने बताया कि मजबूत घरेलू मांग, महंगाई में नरमी, बेहतर फसल और नीतिगत समर्थन भारत की वृद्धि को आगे बढ़ा रहे हैं.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि भारत में महंगाई दर में गिरावट दर्ज की गई है और पहले नौ महीनों में औसतन यह तीन प्रतिशत रही. 2026 में महंगाई के 4.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो आरबीआई के लक्ष्य के करीब है. सार्वजनिक खर्च के चलते बुनियादी ढांचे, रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश बढ़ा है.
रोजगार के मोर्चे पर स्थिति स्थिर बनी हुई है. अक्टूबर 2025 में बेरोजगारी दर 5.2 प्रतिशत रही, जबकि श्रम बल भागीदारी दर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बढ़ी है. भारतीय रुपया वर्ष की पहली छमाही में डॉलर के मुकाबले स्थिर रहा, हालांकि दूसरी छमाही में उस पर दबाव देखा गया.
वैश्विक स्तर पर, रिपोर्ट के अनुसार 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि घटकर 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो महामारी से पहले के औसत से काफी कम है. इसके बावजूद भारत मजबूत घरेलू आधार के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक उज्ज्वल बिंदु बना रहेगा.
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