—- पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल पर प्रभारी मंत्री तुरन्त उठ कर चलते बने।
कुशीनगर, 10 जनवरी (आरएनएस)। जनपद के प्रभारी मंत्री राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार, उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात उ0प्र0 दिनेश प्रताप सिंह ने विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण भीबी जी राम जी विधेयक को ग्रामीण भारत के लिए एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पुराने मनरेगा कानून की कमियों को दूर करते हुए ग्रामीण रोजगार, आय सुरक्षा और टिकाऊ अधोसंरचना को नई दिशा देगा।
उक्त बातें प्रभारी मंत्री श्री सिंह जनपद मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में कहीं। उन्होंने बताया कि इस नए विधेयक के तहत 18 वर्ष से अधिक आयु के इच्छुक ग्रामीण सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। जबकि पहले यह सीमा 100 दिनों तक ही थी। इससे ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि होगी और आजीविका अधिक सुरक्षित बनेगी। प्रभारी मंत्री ने कि नए कानून के अंतर्गत कार्यों को चार प्रमुख श्रेणी जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका से जुड़े कार्य एवं जलवायु, मौसमी जोखिम कम करने वाले कार्यों तक सीमित किया गया है। जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। ग्राम पंचायतों द्वारा बनाए गए विकसित ग्राम पंचायत प्लान को अनिवार्य किया गया है तथा इन योजनाओं को पीएम गति शक्ति जैसी राष्ट्रीय प्रणालियों से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मिशन से ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। रोजगार और आय के अवसर बढ़ेंगे। गांवों में टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण होगा तथा पलायन में कमी आएगी। किसानों को सिंचाई, जल संरक्षण, भंडारण और बाजार तक बेहतर संपर्क सुविधाओं का लाभ मिलेगा। वहीं मजदूरों को 125 दिनों की गारंटी के साथ लगभग 25 प्रतिशत अधिक संभावित आय सुनिश्चित होगी।मजदूरी का भुगतान पूरी तरह डिजिटल माध्यम से आधार एवं बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए सीधे खातों में किया जाएगा। जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण रहेगा। यदि समय पर काम उपलब्ध नहीं कराया गया तो बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य होगा। मनरेगा को नए स्वरूप में बदलने की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए प्रभारी मंत्री ने कहा कि वर्ष 2005 की परिस्थितियों के अनुसार बना कानून आज की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं रह गया था। गरीबी दर में आई कमी, बेहतर संपर्क सुविधाएं और डिजिटल पहुंच को देखते हुए अधिक प्रासंगिक, मजबूत और जवाबदेह रोजगार गारंटी व्यवस्था की जरूरत थी। जिसे यह विधेयक पूरा करता है। वित्तीय व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह विधेयक राज्यों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालेगा। सामान्य राज्यों के लिए केंद्र-राज्य व्यय अनुपात 60:40, उत्तर-पूर्वी व हिमालयी राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के लिए विशेष प्रावधान किए गए है। आपदा की स्थिति में अतिरिक्त सहायता का भी प्रावधान रहेगा। पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक सवाल क्या मनरेगा योजना में पूर्व में कराए गए कार्यों एवं मजदूरो की मजदूरी का भुगतान समय से हो रहा है। इस सवाल पर प्रभारी मंत्री बगले झांकने लगे और उठ कर सभागार से बाहर निकल गए।
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