लखनऊ,10 जनवरी (आरएनएस)। मनरेगा को बचाने के लिए कांग्रेस पार्टी द्वारा शुरू किए गए “मनरेगा बचाओ आन्दोलन संग्राम” के तहत शुक्रवार को पूरे प्रदेश में जिला और शहर कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों ने एक साथ प्रेसवार्ता कर अभियान के प्रथम चरण की औपचारिक शुरुआत की। इसी क्रम में राजधानी लखनऊ में जिला कांग्रेस कमेटी लखनऊ के अध्यक्ष रूद्र दमन सिंह बबलू ने प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए भाजपा सरकार पर मनरेगा को कमजोर और समाप्त करने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया।लखनऊ में आयोजित प्रेसवार्ता में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी वॉर रूम के प्रभारी संजय दीक्षित और स्टेट वॉर रूम के जोनल हेड राघवेन्द्र उपाध्याय भी विशेष रूप से मौजूद रहे। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने मनरेगा को ग्रामीण भारत के लिए जीवनरेखा बताते हुए इसे बचाने के लिए सड़कों से लेकर जनआंदोलन तक का रास्ता अपनाने का ऐलान किया।प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष रूद्र दमन सिंह बबलू ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा कांग्रेस शासनकाल की सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत के करोड़ों गरीब परिवारों की जीवनरेखा है। यह योजना भूख, बेरोजगारी और मजबूरी में होने वाले पलायन के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षा कवच है। मनरेगा ने दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, महिलाओं और भूमिहीन मजदूरों को सम्मान के साथ काम करने का अधिकार दिया है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है।उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद मनरेगा में ऐसे बदलाव किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य इस अधिकार आधारित कानून को कमजोर करना और धीरे-धीरे खत्म करना है। भाजपा सरकार इसे कानून के दायरे से बाहर कर महज एक सामान्य योजना में बदलना चाहती है, जिससे मजदूरों का वैधानिक अधिकार समाप्त हो जाएगा। कांग्रेस पार्टी इस मजदूर विरोधी साजिश को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगी और इसके खिलाफ जनआंदोलन खड़ा करेगी।प्रेसवार्ता में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी वॉर रूम के प्रभारी संजय दीक्षित ने कहा कि ग्रामीण आजीविकाओं पर हो रहे इस गंभीर हमले को देखते हुए कांग्रेस कार्यसमिति ने 27 दिसंबर 2025 को हुई अपनी बैठक में सर्वसम्मति से “मनरेगा बचाओ संग्राम” नामक राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। यह आंदोलन गांव, पंचायत और जिला स्तर तक ले जाया जाएगा ताकि ग्रामीण जनता को मनरेगा के महत्व और भाजपा सरकार की नीयत से अवगत कराया जा सके।उन्होंने कहा कि मनरेगा एक अधिकार आधारित कानून है, जो हर ग्रामीण परिवार को मजदूरी रोजगार मांगने का कानूनी अधिकार देता है। इस कानून के तहत राज्य सरकार की यह बाध्यता है कि 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराए, अन्यथा बेरोजगारी भत्ता देना पड़े। यही वैधानिक गारंटी मनरेगा की आत्मा है, जिसे भाजपा सरकार खत्म करना चाहती है। कांग्रेस पार्टी इस अधिकार को बचाने के लिए पूरे देश में संघर्ष करेगी और भाजपा की जनविरोधी नीतियों को जनता के सामने बेनकाब करेगी।कांग्रेस नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि मनरेगा को कमजोर करना गरीबों, मजदूरों और ग्रामीण समाज के साथ सीधा अन्याय है। “मनरेगा बचाओ आन्दोलन संग्राम” के माध्यम से कांग्रेस पार्टी गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेगी और इस कानून को बचाने के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ेगी।
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