मुर्शिदाबाद 11 जनवरी (आरएनएस)। एक और बीएलओ की मौत की घटना ने एकबार फिर चुनाव आयोग पर सवाल खड़ा कर दिया है। घटना मुर्शिदाबाद जिले में एक प्राथमिक स्कूल की है। स्कूल के अंदर बीएलओ हमीमुल इस्लाम का शव फांसी के फंदे से लटका मिला। परिवार ने आरोप लगाया कि शिक्षक-बीएलओ की दोहरी जिम्मेदारी के साथ-साथ एसआईआर से जुड़े बढ़ते काम के दबाव के चलते उनकी मौत हुई है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। हमीमुल इस्लाम पैकमारी चार कृष्णापुर बॉयज प्राइमरी स्कूल में शिक्षक थे। इसके साथ ही वे खरीबोना ग्राम पंचायत के अंतर्गत पूर्वा अलाइपुर गांव के एक मतदान केंद्र में बीएलओ के तौर पर भी काम कर रहे थे। मामले में रणीतला थाना पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना शनिवार देर रात सामने आई। स्थानीय लोगों ने पैकमारी चार इलाके में स्कूल के अंदर एक कमरे में उनका शव देखा और पुलिस को सूचना दी। वहीं परिवार के सदस्यों ने बताया कि हमीमुल इस्लाम शनिवार सुबह स्कूल जाने के लिए घर से निकले थे, लेकिन दोपहर तक वापस नहीं लौटे। इसके बाद जब काफी देर तक उनका कोई पता नहीं चला तो परिवार और स्थानीय लोगों ने उनकी तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद शनिवार रात उनका शव स्कूल परिसर के एक कमरे में फांसी पर लटका मिला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं मामले में मृतक के परिवार का आरोप है कि हमीमुल इस्लाम पर काम का बहुत ज्यादा मानसिक दबाव था। वे एक तरफ स्कूल में शिक्षक की जिम्मेदारी निभा रहे थे और दूसरी तरफ बीएलओ के रूप में चुनाव से जुड़ा काम भी कर रहे थे। परिवार का कहना है कि हाल के दिनों में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े काम का दबाव काफी बढ़ गया था। इसी वजह से वे लगातार तनाव में रहते थे। वहीं हमीमुल इस्लाम के बड़े भाई फरमान-उल-कलाम ने आरोप लगाया कि एसआईआर से जुड़े काम का दबाव उनके भाई के लिए संभालना बहुत मुश्किल हो गया था। उनका कहना है कि यह दबाव उनकी क्षमता से कहीं ज्यादा था।
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